मांगलिक बहन - भाग १

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"मांगलिक बहन " वरदान या अभिशाप

" बेटी मेरी बात तो सुन, तुझे मेरी कसम हैं मेरी प्यारी सी बेटी, प्लीज़ दरवाजा खोल दे।

अंदर से क़दमों की कोई आवाज नहीं आती बल्कि एक लड़की के जोर जोर से सिसकने की आवाज घर में गूंज रही थी जिसे सुनकर बाहर खड़ी हुई उसकी मा के दिल पर पहाड़ सा टूट रहा था और उसकी भी आंखे भीग गई थी। लेकिन आखिर कार मा तो मा होती हैं और अपनी औलाद का दुख दुनिया की कोई मा बर्दाश्त नहीं कर सकती इसलिए बाहर खड़ी हुई कमला की आंखो से आंसू टपक पड़े।

तभी उसके मस्तिष्क ने उसे कचोट दिया कि मैं तो अपनी बेटी को दिलासा देने अाई हूं और यहां उसके साथ खुद ही रोने लगी, नहीं नहीं मुझे अपने आपको संभालना होगा, मुझे हिम्मत रखनी होगी तभी तो मैं अपनी बेटी को समझा सकती हूं।

कमला ने फुर्ती से अपने आंसू साफ किए और अपने आपको पूरी तरह से नॉर्मल करते हुए बोली:"

" बेटी प्लीज़ मेरी बात तो सुन, भगवान की कसम तुझे, बस दरवाजा खोल दे बेटी। तेरा ये दुख मुझसे देखा नहीं जाता।

" मा आह जाओ आप, भगवान के लिए मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो, आपको तो सब पता ही हैं मा, फिर मुझसे क्यों पूछ रहे हो ?

सौंदर्या ने बड़ी मुश्किल से रुंधे हुए गले से कहा और फिर से उसकी रुलाई फूट पड़ी। इस बार उसके सिसकने की आवाजे पहले के मुकाबले ज्यादा तेज थी और बाहर खड़ी कमला उसकी मा का दिल उसका करुण रुदन सुनकर तार तार हो रहा था। कमला की समझ में नहीं अा रहा था कि कैसे अपनी बेटी को समझाऊं??

सबसे पहले तो जरूरी था कि सौंदर्या दरवाजा खोले और तभी उसके मन में एक विचार अाया और वो भरे हुए गले से बोली:"

" बेटी तुझे मेरी कसम हैं सौंदर्या दरवाजा खोल दे नहीं तो तू अपनी मा का मरा हुआ मुंह देखेगी।

कमला ने आखिर कार मजबूर होकर अपना ब्रह्मास्त्र चला दिया और जिसका नतीजा ये हुआ कि सौंदर्या दौड़ती हुई और उसने दरवाजा खोल दिया और अपनी मा से लिपट गई और रोने लगी।

कमला की भी रुलाई छूट गई और वो भी अपनी बेटी के गले लगकर जोर जोर से रोने लगी। सौंदर्या किसी अमरबेल की तरह अपनी मा से लिपट गई और अपने आंसूओं से अपनी मा का आंचल भिगोने लगी।

बाहर मौसम तो पहले से ही खराब था और अब हल्की हल्की बारिश शुरू हो गई थी मानो आज आसमान भी उनके साथ उनकी बेबसी पर रो रहा था। शायद आज आसमान के भी सब्र का बांध टूट गया था और वो भी इन मा बेटी के दुख में शामिल हो गया था। बारिश जरूर धीरे धीरे हो रही थी कि लेकिन अंदर कमरे में दोनो मा बेटी के आंसुओ की रफ्तार उससे कहीं ज्यादा तेज थी।

कमरा उपर छत पर बना हुआ था और हर तरह की आधुनिक सुख सुविधा से सजा हुआ था। कमरे में फर्श पर पड़े हुए महंगे कार्पेट, थोड़ा सा फर्श का खुला हुआ हिस्सा जिससे फर्श पर हुआ एपॉक्सी साफ दिख रहा था और चींखं चींखं इस बात की गवाही दे रहा था कि कमरे अपने आप में अद्भुत हैं।

कमरे में लगी हुई एयर कंडीशनर, फ्रिज में भरे हुए सूखे मेवे, एक से बढ़कर एक अच्छे किस्म के तरल पदार्थ, जिनका सेवन करना आम आदमी के लिए सपने के सच होने जैसा हो। दो शानदार कुर्सियां और आगे एक छोटी सी कांच की टेबल, कमरे के बीच में सुसज्जित एक विशालकाय आकार का गोल बेड कमरे की सुंदरता में चार चांद लगा रहा था। बेड पर पड़े हुए रेशमी गद्दे अपनी एक अलग ही छटा बिखेर रहे थे। कमरे की खिड़कियों पर पड़े हुए महंगे विदेशी पर्दे कमरे की भव्यता को दर्शा रहे थे।

लेकिन इन सबसे बेखबर दोनो मा बेटी बस एक दूसरे से लिपटी हुई रोए जा रही थी। कमला ने बड़ी मुश्किल से अपने आंसू रोके और अपनी बेटी की पीठ सहलाते हुए बोली:"

" बस कर बेटी, और कितना रोएगी, बस चुप हो जा, मैं तेरा दुख समझती हूं।

सौंदर्या ने अपना आंसूओं से भीगा हुआ चेहरा उपर उठाया तो कमला को एहसास हुआ कि रोने के कारण उसकी बेटी की आंखे सूजकर लाल हो गई है। कमला ने अपनी बेटी के चांद से किए चेहरे को अपने हाथो से साफ किया और बोली:"

" बेटी आज ऐसा क्या हो गया जो तू इतनी ज्यादा रों रही हैं ?

सौंदर्या ने अपनी भीगी हुई पलके उपर उठाई और बोली:"

" मम्मी वो वो सीमा हैं ना जो एक पैर से लंगड़ी हैं और पहले से ही एक बच्चे की मा हैं आज उसकी फिर से सगाई हो गई है।

इतना कहकर सौंदर्या अपनी मा से कसकर लिपट गई। कमला को अब अपनी बेटी के दुख का असली कारण पता चला। कमला ने एक लम्बी सांस ली और अपनी बेटी के बालो में उंगलियां घुमाते हुए बोली:'

" बेटी उसकी अपनी किस्मत हैं, भगवान सबके साथ अच्छा ही करता हैं, देख तेरे लिए भी उसने जरूर कुछ अच्छा सोचा होगा। चिंता ना कर तेरा भाई घर कल घर अा जाएगा और हम दोनों मिलकर तेरे लिए कोई अच्छा लड़का देखेंगे।

अपनी मा की बात सुनकर सौंदर्या को झटका सा लगा और बोली:"

" मम्मी आप शायद गलत समझ रही हैं, मैं अपनी शादी ना होने की वजह से नहीं बल्कि समाज के बनाए गए कानूनों से दुखी हूं। क्या एक लड़की का मांगलिक होना इतना बड़ा अपराध हैं कि उसे कदम कदम पर सिर झुका कर चलना पड़े।

कमला:" बेटी देख अब बड़ों ने हो नियम कायदे कानून बनाए हैं वो कुछ सोच समझ कर ही बनाए होंगे। हमे भी इनका पालन करना चाहिए और इसमें ही हमारी भलाई होगी।

सौंदर्या:" लेकिन मा जरूरी नहीं कि जो नियम हजारों साल पहले बनाए थे वो आज के माहौल में भी ठीक हो। समय बदल रहा हैं तो काफी कुछ अब पहले जैसा नहीं हैं।

कमला:" मैं तेरी बात से सहमत हूं बेटी, लेकिन फिर भी हमे समाज के साथ ही चलना होगा। हम समाज का सिर्फ एक हिस्सा हैं अपने आप में पूरा समाज नहीं।

सौंदर्या:" लेकिन मा मैं नहीं मानती ऐसे नियम कानूनों को। बताओ मेरे मांगलिक होने में मेरा क्या कसूर, मुझे तो पता भी नहीं था कि गृह और नक्षत्र क्या होते हैं, उसकी गति और स्थिति क्या होती हैं।

कमला से आज भी अपनी बेटी के सवालों का जवाब नहीं बन रहा था इसलिए उसने अपने आपको बचाने के लिए कहा:"

" देख मैं तेरी तरह ज्यादा समझदार और पढ़ी लिखी नहीं हू, तेरा भाई अा रहा है उसे ही बताना ये ज्ञान की बाते तू।

कमला ने अपनी बेटी की तरफ देखते हुए अपने मुंह को हल्का सा गुस्से से फूला लिया तो सौंदर्या के होंठो पर पहली बार मुस्कान साफ दिखाई दी और उसने अपने मम्मी को कहा:"

" अच्छा मम्मी एक बात बताओ, चलो मैं तो बच्ची थी जब मेरा जन्म हो रहा था लेकिन आपको तो ग्रहों और नक्षत्रों के बारे में पूरी जानकारी थी, आपको फिर मुझे उस समय जन्म नहीं देना चाहिए था, कुछ घंटे या एक दिन बाद दे देती।

ये कहकर सौंदर्या की हंसी छूट गई और कमला को जैसे ही सारी बात समझ में अाई तो वो हंसती हुई मारने के लिए अपनी बेटी की तरफ बढ़ी और बोली:"

" रुक जा तू, अभी ठीक करती हूं, तेरी जुबान बहुत ज्यादा चलती है आज तुझे सबक सिखा देती हूं।

सौंदर्या फुर्ती से बचकर निकल गई और बेड के पास खड़ी हो गई। कमला तेजी से आगे बढ़ी और अपनी बेटी को पकड़ लिया और कान पकड़ कर खींचती हुई बोली:"

" कुछ ज्यादा ही बिगड़ गई है तू, आज तेरी अच्छे से खबर लेती हूं।

सौंदर्या ने अपने दोनो कान पकड़ लिए और मासूम सी सूरत बनाते हुए बोली:"

" मम्मी प्लीज़, माफ कर दो ना, छोटी बच्ची हूं। इतनी समझ नहीं हैं मुझे।

कमला उसकी इस हरकत पर मुस्कुरा उठी और दोनो मा बेटी हंसने लगीं। अब कमरे में दोनो मा बेटी की प्यारी सी हंसी गूंज रही थी और बाहर आसमान में छाए हुए काले बादल भी अब काफी हद तक छंट चुके थे और बारिश रुक गई थी। हल्की हल्की धूप निकल रही थीं और सूरज की किरणें अपनी अलग ही छटा बिखेरती हुई नजर आ रही थी मानो सौंदर्या की गूंजती हुए हंसी पर अपनी खुशी प्रदर्शित कर रही हो।

पात्र परिचय:"

सौंदर्या:" करीब 34 साल की एक गोरी चित्ती लड़की, लंबाई लगभग 5 फीट 5 इंच, दूध सा गोरा चित्ता रंग, काले घने बाल, उसके जांघो तक लहराते हुए, चौड़ा लेकिन बहुत ही प्यारा सुंदर सा माथा, हिरनी जैसी दो गोल गोल झील सी गहरी आंखे, जिनके उपर कवि ना जाने कितनी ही कविता लिख दे, एक गज़ब का सम्मोहन जिसे देखे वो चुंबक की तरह खीच जाए, गोरे गोरे गाल बिल्कुल गुलाबी रंग की रंगत लिए हुए, बिल्कुल भरे भरे, होंठ ऐसे मानो दो गुलाब की पंखुड़ियों को आपस में जोड़ दिया गया हो, बिल्कुल कोमल, नाजुक, नर्म, पतले पतले, गालों से भी कही ज्यादा गुलाबी, उसके बाद उसकी सुंदर की ठोड़ी जिस पर एक काला तिल उसकी सुंदरता की आभा को और ज्यादा निखार देता, बहुत ही प्यारी सी सुंदर सी लंबी की गर्दन बिल्कुल किसी मोरनी की तरह।

फिगर:" 36: 28: 38

सौंदर्या एक डिग्री कालेज में अध्यापक हैं। वहां सभी लोग उसके दीवाने हैं जिसका कारण हैं उसका सभी के प्रति अच्छा व्यवहार, उसका मदमस्त शरीर, उसकी गोल पुष्ट, कठोर उभरी हुई चूचियां और पीछे की तरफ निकली हुई उसकी गांड़।

सौंदर्या की सबसे बड़ी समस्या उसका मांगलिक होना हैं जिसके चलते उसकी उमर 34 साल हो गई है लेकिन फिर भी उसे कोई उचित वर नहीं मिला है। उसके साथ की सभी लड़कियों की एक एक करके शादी हो गई और एक वो ही बची हैं बस। 34 साल की उम्र के कारण उसका जिस्म पूरी तरह से परिपक्व होकर अपनी अनोखी छटा बिखेर रहा है।

कमला:"

कमला:" अजय और सौंदर्या की मम्मी, उम्र 52 साल, एक उच्च विचार और संस्कारी महिला, अपने बच्चो से बहुत प्यार करने वाली जिसके लिए उसके बच्चे ही उसकी दुनिया हैं।

अजय:" उम्र करीब 22 साल, लंबाई 5 फीट 11 इंच, देखने में सुन्दर और सबसे बड़ी बात ये मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट भी हैं, लेकिन अपनी मा की जिद के चलते इसने वो सब छोड़ दिया और अभी सिर्फ पढ़ाई पर अपना ध्यान देता हैं। शादाब का दोस्त हैं

शादाब:" वही मा का दीवाना बेटा, अपनी मा शहनाज का आशिक, जिसके बारे में आप सभी पहले ही पढ़ चुके हैं।

शहनाज:" शादाब की अम्मी, अब उसकी बीवी बन चुकी हैं और अपने बेटे के साथ अमेरिका में जाकर बस गई है।

काफी देर तक दोनो मा बेटी की हंसी भरी आवाज घर में गूंजती रही और फिर कमला बोली

:" अच्छा बेटी चल अब मुझे घर का काम भी देखना हैं और कल तेरा भाई भी घर अा जाएगा उसके लिए कुछ अच्छी अच्छी मिठाई बनानी हैं मुझे।

सौंदर्या:" हान मम्मी, कल अजय भी घर अा रहा हैं, 5 साल हो गए हैं उसे घर आए हुए, पता नहीं कैसा दिखता होगा अब वो।

कमला:" अरे बेटी वो अपनी पढ़ाई को लेकर बहुत ज्यादा गंभीर हैं। और तू तो जानती ही हैं उसने जब से गांव में यहां मुखिया के लड़के को पीट दिया था तो उसे शहर भेजने के अलावा मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा था।

सौंदर्या:" मम्मी आपने सही किया लेकिन आप तो अच्छे से जानती हैं कि मुखिया का लड़का मनोज एक गुंडा किस्म का इंसान हैं और गांव की सारी लडकीयों पर आते जाते गंदे कॉमेंट करता हैं। अजय ने अच्छा ही तो किया था उसे पीट कर। मुझे अपने भाई पर गर्व है।

कमला:" हान बेटी मैं जानती हूं लेकिन तुझे ये बात समझनी चाहिए कि अभी उसकी मारपीट करने की उम्र नहीं हैं, पढ़ लेगा तो कुछ बन जाएगा।

सौंदर्या:" समझती हूं मम्मी, बस इसलिए तो उसे शहर भेज दिया था। नहीं तो आप तो जानती हो कि मैं अपने भाई से कितना प्यार करती हूं।

कमला:" तू अब फिक्र ना कर बेटी, अब तो गांव का मुखिया भी बदल गया है और राम बाबू एक बहुत अच्छे और नेक इंसान हैं। उन्होंने मनोज को पंचायत में ही समझा दिया था कि अपने हरकते बंद करे नहीं तो गांव छोड़ दे।

सौंदर्या:" हान मम्मी ये बात तो हैं, सच में जब से राम बाबू मुखिया बने हैं तब से अपने गांव का तो माहौल ही बदल गया है।

कमला: अच्छा चल ठीक हैं, अब मैं खाना बना लेती हूं, तुम शाम को जाओगी क्या सीमा के घर ?

सौंदर्या:" मम्मी बुलाया तो हैं उसने, देखूंगी अगर मन किया तो चली जाऊंगी।

कमला: चली जाना बेटी, गांव समाज में सबके यहां आना जाना ही सही होता हैं।

इतना कहकर कमला नीचे अा गई और रसोई में घुस गई और रात के खाने का इंतजाम करने में जुट गई।

वहीं सौंदर्या अपने भाई के बारे में सोचने लगी कि जब वो मात्र 17 साल का था तभी उसने मनोज का हाथ तोड़ दिया था क्योंकि मनोज ने मेरा हाथ पकड़ लिया था। सच में मेरा भाई अपनी बहन की मान मर्यादा और सम्मान का सम्मान का रक्षक हैं।

धीरे धीरे रात होने लगी और बाहर अब पूरी तरह से अन्धकार हो गया था और सर्दी के चलते लोग अपने घरों में घुस गए थे। सौंदर्या और कमला दोनो ने खाना खाया।

सौंदर्या:" मम्मी बाहर काफी ठंड हैं, मेरा मन नहीं कर रहा आज सीमा के यहां जाने के लिए।

कमला:" कोई बात नही बेटी, तुम कल चली जाना, वैसे भी देखो ना बाहर कितना ज्यादा अंधेरा हो गया है आज इतनी जल्दी ही।

सौंदर्या अपनी मा की बात सुनकर खुश हो गई और उसके बाद दोनो आराम से रजाई में घुस गई और सो गई।

अगले दिन सुबह सौंदर्या जल्दी ही उठ गई और अजय के कमरे की सफाई में जुट गई। वो जानती थी कि आज उसका भाई वापिस अा रहा हैं इसलिए वो उसके कमरे को बिल्कुल साफ सुथरा कर देना चाहती थी। उसने पूरे कमरे को अच्छे से साफ किया और उसके बाद एक एक सामान और अजय के कपड़ों को ठीक किया और फिर नहाकर पूजा करने चली गई।

पूजा करने के बाद उसने नाश्ता किया और अपने कॉलेज जाने के लिए तैयार हो गई। आज उसके चेहरे पर एक अलग ही तेज और खुशी नजर अा रही थी।

कमला:" क्या बात हैं बेटी आज बहुत खुश नजर आ रही हो ?

सौंदर्या:" मम्मी आज सचुमच एक बहुत खुशी का दिन हैं, मेरा भाई आज घर वापिस अा रहा हैं।

कमला:" ओह अब समझी तेरी ख़ुशी, तेरा भाई अा रहा हैं तो तेरे लिए अच्छा सा सुंदर सा लडका देखकर तेरी शादी कर देगा।

शादी की बात सुनकर सौंदर्या के चेहरा शर्म से लाल हो गया और वो अपना मुंह नीचे करके मंद मंद मुसकाई और फिर बोली:'

" क्या मम्मी, ऐसा कुछ नहीं हैं, आप जब देखो मेरे पीछे ही पड़ी रहती हो।

कमला:" बेटी तेरा चेहरा सब कुछ बयान कर रहा है। अब इसमें मेरा क्या कसूर हैं

सौंदर्या फिर से शर्मा गई और अपना बैग उठाकर बाहर की तरफ चल पड़ीं। आज सचमुच उसके कदम खुशी से उठ रहे थे क्योंकि वो जानती थी कि उसका भाई और उसकी मम्मी मिलकर अब जरूर उसके लिए कोई अच्छा लड़का देख लेंगे।

सौंदर्या को कॉलेज में आए हुए दोपहर हो गई और आज उसका मन किसी भी काम में नहीं लग रहा था। उसे बस रह रहकर अपने भाई की याद आ रही थी।

धीरे धीरे उसकी छुट्टी का समय हो गया और वो अपनी गाड़ी निकाल कर घर की तरफ चल पड़ी। उसने देखा कि बीच रास्ते में भीड़ लगी हुई थी और आगे गाड़ी नहीं जा सकती थी। क्या हुआ ये देखने के लिए सौंदर्या गाड़ी से उतर गई और आगे की तरफ बढ़ गई। तभी उसके कानों में एक लड़की की मार्मिक आह सुनाई दी और उसे खतरे का अंदेशा हुआ और उसके कदम तेजी से आगे बढ़ गए। उसने देखा कि एक करीब 16 साल की लड़की को कुछ गुंडे पीट रहे थे और वहां खड़े हुए सभी लोग तमाशा देख रहे थे और लड़की सबकी तरफ आशा भरी निगाहों से देख रही थी लेकिन गुण्डो दस से ज्यादा थे इसलिए कोई हाथ डालने की हिम्मत नहीं कर रहा था।

एक गुंडे ने लड़की का सूट फाड़ दिया और लड़की बुरी तरह से खौफजदा हो गईं और अपने आपको अपने हाथो से छुपाते हुए बोली:"

" आह भगवान के लिए मुझे छोड़ दो, मैंने क्या बिगाड़ा हैं तुम्हारा ? मुझे मासूम पर दया करो।

एक लड़की ने लड़की की ब्रा की तरफ हाथ बढ़ाया और तभी उसके मुंह पर एक जोरदार थप्पड़ पड़ा और सभी की आंखे उस तरफ उठ गई। सौंदर्या शेरनी की तरह दहाड़ते हुए बोली

" बहुत हो गया तुम्हारा तमाशा, अब हाथ लगाकर दिखाओ इसे, हाथ ना तोड़ दिया तो मेरा नाम भी सौंदर्या नहीं।

एक पल के लिए तो सभी की हालात खराब हो गई लेकिन फिर एक गुंडा हिम्मत करके बोला

" अरे वाह झांसी की रानी, तू तो सच मुच अपने नाम की तरह सुंदर हैं। अब इस लड़की के साथ साथ तुझे भी सबक सिखाना पड़ेगा।

सौंदर्या को उम्मीद थी कि उसके गुंडे को थप्पड़ मारने से भीड़ का आत्म सम्मान जाग जाएगा और गुण्डो पर टूट पड़ेगी लेकिन यहां तो उल्टा हुआ। जैसे ही गुंडे अब उसकी तरफ बढ़े, भीड़ अपने आप पीछे की तरफ खिसक गई। वो मासूम लड़की डर के मारे सौंदर्या के पीछे छिप हुई और थर थर कांपने लगी।

अंदर से तो सौंदर्या की भी हालत खराब हो गई थी लेकिन फिर भी वो अपने आप को तसल्ली दी और बोली:"

" खरबदर जो एक कदम ही आगे बढ़ाया, मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।

गुंडा:" तुम तो आज गई काम से, गलत जगह पंगा ले लिया तुमने। आज के बाद सचमुच मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। अरे आओ और उठा लो इसे और ले चलो अपने अड्डे पर।

एक साथ कई गुंडे उसकी तरफ बढ़े और सौंदर्या आखिरी बार भीड़ की तरफ देखते हुये बोली:"

" अरे क्या तुम्हे अंदर थोड़ी सी भी शर्म बाकी हैं ? हमारी जगह यदि तुम्हारी अपनी बेटी होती तो क्या तब भी तुम लोगो जैसे ही खड़े रहते ?

गुंडे ने अपनी जेब से चाकू निकाला और भीड़ की तरफ लहराते हुए बोला'"

" अगर किसी को अपनी ज़िंदगी प्यारी नहीं हो तो आगे बढ़े ।

भीड़ आगे तो क्या बढ़ती, लोग अपनी जगह से चार कदम पीछे की तरफ हटने लगे। सौंदर्या समझ गई कि अब उसका बचना मुश्किल हैं और कोई चमत्कार ही उसे बचा सकता हैं।

सौंदर्या की आंखे भीग गई और आखिरी बार उसने भीड़ कि तरफ देखते हुए कहा:

" तुम सबमें क्या कोई मर्द बचा हुआ हैं या सब के सब हिजड़े बन गए हो , भगवान के लिए आगे बढ़ो।

गुंडे जोर जोर से हंसने लगे और सौंदर्या के साथ साथ उसके पीछे खड़ी हुई लड़की जोर से कांपने लगी। तभी एक एक गुंडा आगे की तरफ बढ़ा और इससे पहले कि वो सौंदर्या को छू पाता एक नौजवान बिजली की गति से उछल कर उसके सामने खड़ा हो गया और उसने एक जोरदार लात गुंडे को मारी और गुंडा फिल्मी स्टाइल में उड़ता हुआ दूर जाकर गिरा। लड़के के मुंह पर एक मास्क लगी हुई थी जिससे उसकी शक्ल किसी की पहचान में नहीं अा रही थी लेकिन सौंदर्या और उसके लिए तो वो किसी फ़रिश्ते से कम नहीं था

शेरा ( गुण्डो का सरदार):" कौन हैं बे तू हराम खोर ? तूने बेवजह अपनी मौत को बुला लिया हैं ?

लड़का:" मैं कौन हूं ये तुम छोड़ो, और मैं क्या कर सकता हूं ये देखो। इन लड़कियो को उठाना तो दूर की बात तुम सिर्फ हाथ लगाकर दिखा दो।

शेरा एक डरावनी सी हंसी हंसते हुए बोला:"

" तो तू हमे रोकेगा ? लगता है तेरा इस दुनिया से मन भर गया हैं, अरे देख क्या रहे हो, खत्म कर दो साले को इसे।

एक साथ गुंडे आगे बढ़े और नौजवान की आंखो में चमक उभरी और बिजली की गति से अपनी जगह से उछला और हवा में उड़ता हुआ गुण्डो पर टूट पड़ा, देखते ही देखते सारे गुंडे जमीन पर गिर पड़े। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा हैं और वो लड़का बिजली की गति से हवा में उड़ते हुए लगातार वार पर वार कर रहा था और देखते ही देखते सभी गुंडे सड़क पर पड़े हुए कराह रहे थे। किसी का हाथ तो किसी का पैर टूट चुका था। अपने गुण्डो की ऐसी दुर्दशा देखकर शेरा पसीने पसीने हो गया और उसकी समझ में कुछ नहीं अाया और जान बचाकर भागने लगा।

नौजवान ने उसे देखा और उसके होंठो पर मुस्कान उभर अाई और उसने पूरी ताकत से शेरा के पीछे दौड़ लगा दी और कुछ ही पल बाद शेरा उसकी गिरफ्त में था और एक जोरदार घूसे के साथ ही जमीन पर गिर पड़ा।

लड़के ने उसकी टांगो को पकड़ लिया और उसे घसीटते हुए खीचनें लगा। गुंडे की दर्द भरी आह निकल रही थी और अगले ही पल वो सौंदर्या के पैरो में पड़ा हुआ था और रोते हुए बोला:"

" मुझे माफ़ कर दो बहन, मुझसे गलती हो गई, आज के बाद किसी को लड़की को गलत नजर से नहीं देखूंगा।

सौंदर्या ने नीचे झुकते हुए एक थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया और गुंडा उसके पैर पकड़कर माफी मांगने लगा और बोला:"

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