अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति - भाग ४

भाग ४ · 4 chaptersअजय, शोभा चाची और माँ दीप्तिAll chapters
अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति - भाग ४

दोनों औरतें चुप थीं. शोभा के हाथ दीप्ति के बदन पर रेंग रहे थे और दीप्ति अपने बदन में उठती सैक्स तरंगों को अच्छे से महसूस कर सकती थी. लेकिन अजय और उसके पिता की तुलना के बारे में वो कुछ नहीं बोल सकती थी. शोभा ने ही बातचीत में आये गतिरोध को तोड़ा. "एक बार जब में उसके ऊपर चढ़ी तो अजय के लन्ड ने यहां तक जगह बना ली." अपने पेट पर नाभी के पास हाथ से इशारा करते हुये उसने दीप्ति को दिखाया. "मैनें तो सोचा था कि एक बार अजय को मुत्ठ मार के झड़ा दूंगी तो चली जाऊंगी. लेकिन पता नहीं कब मैं अपने होश खो बैठी और अजय के ऊपर चढ़ गयी. उसके बाद अजय ने अपने आप वो तगड़ा लन्ड पूरा का पूरा मेरी चूत में डाल दिया. देखो यहां तक" अजय की प्रशन्सा करना अब शोभा को अच्छा लग रहा था. (पाठकों को याद होगा कि शोभा ने अपने हाथ से अजय के लन्ड को अपनी चूत का रास्ता दिखाया था, बिचारे १९ साल के कुंवारे अजय को क्या मालूम की औरत की चूत में लन्ड कहां डालना होता है. दीप्ति से ये सब तथ्य छिपाना जरूरी था.) दीप्ति ने शोभा की आंखों में देखा.

ये औरत कुछ ही घन्टे पहले उनके लाड़ले के ऊपर चढ़ी हुई थी. शोभा की चूत में भरा हुआ अजय के लन्ड का चित्र दीप्ति के दिमाग में अपने आप बन गया. शोभा ने अजय का कुमारत्व छीन कर उसे बच्चे से जवान मर्द तो बना ही दिया था. अजय, अपने बेटे की जिन्दगी में किसी दूसरी औरत का साया पाकर उसका मन शोभा के लिये जबरदस्त जलन से भर गया. शोभा को खुद से दूर करके दीप्ति उठी और रसोई में चली गयी. शोभा की आंखों में देख कर ना तो वो अपनी जलन को जाहिर करना चाहती थी और ना ही अजय के लिये अपने दिमाग में चलते आज रात के प्लान के बारे में उसे कुछ भनक पड़ने देना चाहती थी. अपने इकलौते बेटे को वो किसी के साथ भी नहीं बांट सकती थी. अगर अजय को किसी औरत का साथ ही चाहिये था तो वो साथ दीप्ति का ही होना चाहिय था किसी और का नहीं. जिन निपल्लों को अजय ने चूसा वो उसकी मां के ही होने चाहिये थे और उसके औजार ने शोभा की जो चूत मारी थी वो अब सिर्फ़ दीप्ति की होनी चाहिये थी. कम से कम इस वक्त वो अजय के पुरुषत्व को छुना चाहती थी. उसे अपने करीब महसूस करना चाहती थी. खुद की चूत से जो पानी बह कर जांघों तक पहुंच गया था और अब वो दीप्ति को आज रात तक चैन नहीं लेने देगा. हे भगवान, क्या क्या सोच रही है दीप्ति? अपने ही बेटे के साथ हमबिस्तर होकर वो अजय को वापिस पा लेगी. दीप्ति की लम्बी चुप्पी ने शोभा पर कुछ और ही असर किया. शायद दीप्ति इस पूरे प्रकरण से काफ़ी आहत हुई थी और शोभा से फ़िर कभी बात ही नहीं करेगी. कहीं दीप्ति ने सब कुछ उसके पति को बता दिया तो गजब ही हो जायेगा. पूरे परिवार में दरार पड़ जायेगी.

देर रात १० बजे. शोभा और कुमार घर छोड़ कर जा चुके थे. कुमार ने ऑफ़िस का कुछ जरूरी काम बता वहां से विदा ली. दीप्ति को मालूम था कि असली वजह शोभा और उसके बीच सवेरे चला लम्बा वार्तालाप था. सवेरे जब चाय बना कर उसने सब को आवाज लगाई तो शोभा सबसे आखिर में पूरी तरह से तैयार हो कर डाईनिंग टेबिल पर आई थी. तब तक अजय अपने कॉलेज के लिये निकल चुका था. पूरे दिन के लिये अपनी सहेली के घर जाने का बहाना बना कर निकल गयी और फ़िर दीप्ति के सामने नहीं आई. दीप्ति अपने कमरे में बैठी कुछ सोच रही थी. गोपाल सो रहे थे. आज का पूरा दिन मानसिक और शारीरिक उथल पुथल से भरा रहा था. दीप्ति ने आज पूरे दिन अजय पर नज़र रखी थी. अजय दिन भर अपनी पैंट के उभार को ठीक करता रहा था. बिचारा अपनी प्यारी चाची को ढूंढ रहा था. बोलना चाहता था कि वो उनसे कितना प्यार करता है. लेकिन उसकी प्यारी चाची तो कब की उसे छोड़ कर जा चुकी थीं. जब बार बार अजय किसी ना किसी बहाने से शोभा के बारे में पूछता तो दीप्ति का दिल जल उठता. अजय को सिर्फ़ उसके बारे में ही सोचने का हक था. काश, उसने अजय को नहलाना बन्द नहीं किया होता तो जो सब शोभा ने किया वही सब वो खुद भी करती थी. उसका बेटा आज अपनी चाची का नहीं बल्कि उसका दिवाना होता था. अपने ही बेटे के बारे में उसके कामुक विचार विकराल रुप धारण कर चुके थे. तेज होती सासें, पैरों के बीच अजय के लन्ड को महसूस करने की चाह और जबरदस्त तने हुये निप्पल सब कुछ वास्तविक था. और एक वास्तविकता ये भी थी कि वो अजय की मां थी. ममता और वासना की मिली जुली भावनाओं से दीप्ति के दिमाग में हलचल सी मची हुई थी. लेकिन जल्द ही वासना ने प्रेम के साथ मिल कर सब कुछ अपने काबू में कर लिया. दिमाग अब सिर्फ़ अजय के शरीर के बारे में सोचने लगा. आखिर कैसा होगा अजय का हथियार? लम्बा या मोटा? शोभा क्यूं कह रही थी की अजय बिल्कुल अलग है? या शायद अजय में वहीं जन्गली जानवर है जिसे सैक्स के समय हर औरत अपने सहचर में पाना चाहती है? इन सब विचारों से दीप्ति का शरीर कांप रहा था. अब निर्णय की घड़ी पास ही थी. दीप्ति अजय के कमरे मे दबे पांव घुसी. आज रात अपने बच्चे को पास से देखना चाहती थी. अजय के बिस्तर के किनारे पर लेटी हुई दीप्ति, अजय की मां, उसके नन्गे जिस्म को निहार रही थीं. अजय गहरी नींद में था. और दीप्ति की आंखों में दूर दूर तक नींद का नामोनिशान नहीं था. निषिद्ध सैक्स और अजय के लिये मन में घर कर चुकी वासना ने उन्हें सोने ही नहीं दिया था.

अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति--पार्ट -5

थोड़ी देर के लिये दीप्ति की आंख भी लग गयी. अचानक, बिस्तर के हिलने और कराहने की आवाजों से दीप्ति जाग गयी. आंखें जब अन्धेरे की अभ्यस्त हुयीं तो देखा कि अजय चादर के अन्दर हाथ डाले किसी चीज को ज़ोर ज़ोर से हिला रहा था. अजय, कमरे में अपनी मां कि मौजूदगी से अनभिज्ञ मुट्ठ मारने में व्यस्त था. शायद अजय कल की रात को सपनों में ही दुहरा रहा था. "आह, चाचीईईई" अजय की कराह सुनकर दीप्ति को कोई शक नहीं रह गया कि अजय के दिमाग में कौन है. शोभा के लिये उनका मन घृणा से भर उठा. आखिर क्यूं किया उसने ऐसा? आज उनका लाड़ला ठीक उनके ही सामने कैसा तड़प रहा है. और वो भी उस शोभा का नाम ले कर. नहीं. अजय को और तड़पने की जरुरत नहीं है. उसकी मां है यहां पर उसकी हर ज़रुरत को पूरा करने के लिये. अजय के लिये उनके निर्लोभ प्रेम और इस कृत्य के बाद में होने वाले असर ने क्षण भर के लिये दीप्ति को रोक लिया. अगर उनके पति अजय के पिता को कुछ भी पता चल गया तो? कहीं अजय ये सोचकर की उसकी मां कितनी गिरी हुई औरत है उन्हें नकार दे तो? या फ़िर कहीं अजय जाकर सब कुछ शोभा को ही बता दे तो? तो, तो, तो? बाकी सब की उसे इतनी चिन्ता नहीं थी. और अपने पति को वो सब कुछ खुद ही बता कर समझा सकती थी कि अजय की जरुरतों को पूरा करना कितना आवश्यक था. नहीं तो जवान लड़का किसी भी बाजारु औरत के साथ आवारागर्दी करते हुये खुद को किसी भी बिमारी और परेशानी में डाल सकता था. पता नही कब, लेकिन दीप्ति चलती हुई सीधे अजय की तरफ़ बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गईं. अजय ने भी एक साये को भांप लिया. तुरन्त ही समझ गया की ये शख्स कोई औरत ही है और पक्के तौर पर घर के अन्दर से ही कोई ना कोई है. क्या उसकी प्यारी शोभा चाची लौट कर आ गयीं हैं? क्या चाची भी उससे इतना ही प्यार करती है जितना वो उनसे? रात अपना खेल खेल चुकी थी. उसकी बिस्तर की साथी उसके पास थीं. अपने लन्ड पर उसकी पकड़ मजबूत हो गयी. बिचारा कितना परेशान था सवेरे से. दसियों बार मुत्ठ मार मार कर टट्टें खाली कर चुका था. लेकिन अब उसकी प्रेमिका उसके पास थी. और वो ही उसको सही तरीके से शान्त कर पायेंगी.

दीप्ति कांपते कदमों से अजय कि तरफ़ बढ़ी. सही और गलत का द्वंद्ध अभी तक उसके दिमाग में चल रहा था. डर था कि कहीं अजय उससे नफ़रत ना करने लगे. तो वो क्या करेगी? कहीं वो खुद ही अपने आप से नफ़रत ना करने लगे. इन सारे शकों के बावजूद बेटे को चोदने का ख्याल दीप्ति अपने दिल से नहीं निकाल पाई. चादर के अन्दर हाथ डाल कर लन्ड के ऊपर जमे अजय के हाथों को अपने दोनो हाथों से ढक लिया. अब जैसे जैसे अजय लन्ड पर हाथ ऊपर नीचे करता दीप्ति का हाथ भी खुद बा खुद उपर नीचे होता. "चाची" अजय फ़ुसफ़ुसाया. अपना हाथ लन्ड से अलग कर मां के हाथों को पूरी आजादी दे दी उस शानदार खिलौने से खेलने की. अपने सपनों की मलिका को पास पाकर अजय का लन्ड कल से भी ज्यादा फ़ूल गया. दीप्ति ने अजय के लन्ड पर उन्गलियां फ़िराईं तो नसों में बहता गरम खून साफ़ महसूस हुआ.

आंखे बन्द करके पूरे ध्यान से उस महान औजार को दोनो हाथों से मसलने लगी. दीप्ति के दिल से आवाज आई कि ये अजय का लन्ड कभी उसी के शरीर का एक हिस्सा था. इतना कठोर, इतना तगड़ा, अपने ही पानी से पूरी तरह से तर ये जवानी की दौलत उसकी अपनी थी. इससे पहले अपनी जिन्दगी में उन्होनें कभी ऐसे किसी लन्ड को हाथ में नहीं लिया था. याद नहीं अजय के जन्म से पहले क्या खाया था कि आज उसका लन्ड अपने बाप चाचा से भी कहीं आगे था.

अपने ही ख्यालों में डूबी हुई उस मां को ये भी याद नहीं रहा कि कब उनकी मुट्ठी ने अजय के लन्ड को कसके दबाकर जोर जोर से दुहना चालू कर दिया. लन्ड की मखमली खाल खीचने से अजय दर्द से कराह उठा. हाथ बढ़ा कर अजय ने मां की अनियंत्रित कलाई को थामा. दीप्ति ने दूसरे हाथ से अजय का माथा सहलाया. खुद को घुटनों के बल बिस्तर के पास ही स्थापित करती हुई दीप्ति ने लन्ड को मुठियाना चालू रखा. अजय के चेहरे से हटा अपने हाथ को दीप्ति ने अब उसके सीने पर निप्पलों को आनन्द देने के काम में लगा दिया.

"हाँ आआआआहहहह". शरीर पर दौड़ती जादुई उन्गलियों का असर था ये. और ज्यादा आनन्द की चाह में अजय बेकरारी में अपनी कमर हिलाने लगा.

अजय के हाथ मां के कन्धों पर जम कर उन्हें अपने पास खीचने लगे. अन्धेरी रात में अजय उस मादा शरीर को अपने पूरे बदन पर महसूस करना चाहता था. लेकिन उसकी प्रेमिका ने तो पूरे कपड़े पहने हुये है. अजय की उत्तेजना अपने चरम पर थी.

उधर दीप्ति ने भी शरीर को थोड़ा और झुकाते हुए अजय के खड़े लन्ड तक पहुंचने की चेष्टा की. जो शोभा ने किया वो वह भी कर सकती है. तो क्या हुआ अगर लन्ड चूसने का उसका अनुभव जीरो है, भावनायें तो प्रबल हैं ना. एक बार के लिये उसे ये सब गलत लगा किन्तु अपने ही बेटे के साथ सैक्स करने से ज्यादा गलत भला क्या होता. मन थोड़ा अजीब सा हो रहा था लेकिन फ़िर शोभा का ख्याल आते ही नया जोश भर गया. अगर उसने आज अजय का लन्ड नहीं चूसा तो वह कल फ़िर से इस आनन्द को पाने के लिये शोभा के पास जा सकता है. नहीं. नहीं. आज किसी भी कीमत पर वो अपने लाड़ले के दिलो दिमाग से शोभा की यादें मिटा देगी चाहे इसके लिये उन्हें कुछ भी क्युं ना करना पड़े.

अजय अब अपनी सहचरी का चेहरा देखना चाहता था. वहीं चेहरा जो कल रात किसी देवी की मूर्ति की तरह चमक रहा था. हाथ बढ़ाकर बिस्तर के पास की लैम्प जलाई तो लम्बे बालों मे ढका चेहरा आज कुछ बदला हुआ लगा. ये उसकी चाची तो नहीं थीं. दीप्ति ने अपना चेहरा अजय की तरफ़ घुमाया तो लड़के के चेहरे पर दुनिया भर का आश्चर्य और डर फ़ैल गया. अजय जल्दी से अपनी चादर की तरफ़ झपटा. दीप्ति समझ गईं अभी नहीं तो कभी नहीं वाली स्थिति आ खड़ी हुई है. अगर उन्होनें वासना और अनुभव का सहारा नहीं लिया तो इस मानसिक बाधा को पार नहीं कर पायेंगी और फ़िर अजय भी कभी उनका नहीं हो पायेगा.

लन्ड पर तुरन्त ही झुकते हुये दीप्ति ने पूरा मुहं खोला और अजय के तन्नाये पुरुषांग को निगल लिया. मां के होंठ लन्ड के निचले हिस्से पर जमे हुये थे. मुहं के अन्दर तो लार का समुन्दर सा बह रहा था. आखिर पहली बार कोई लन्ड यहां तक पहुंचा था. लन्ड चुसाई करते हुए भी दीप्ति के दिल में सिर्फ़ एक ही जज्बा था कि वो अजय को सैक्स के चरम पर अपने साथ ले जायेगी जहां ये लड़का सब कुछ भूल कर बस उन्हीं को चोदेगा.

दो मिनट पहले के मानसिक आघात के बाद जो लन्ड थोड़ा नरम पड़ गया था वो फ़िर से अपने शबाब पर लौट आया. मां के लम्बे बाल अजय की जांघों और पेट पर बिखर कर अलग ही रेशमी अहसास पैदा कर रहे थे. पिछली रात से बहुत ज्यादा अलग ना सही लेकीन काफ़ी मजेदार था ये सब. अजय ने भी अब सब कुछ सोचना छोड़ कर मां के सिर को हाथों से थाम लिया और फ़िर कमर हिला हिला कर उनके मुहं को चोदने लगा.

अजय का नियंत्रण खत्म हो गया. वो अभी झड़ना नहीं चाहता था परन्तु मां का मखमली मुहं, वो जोश, वो गर्मी और मुहं से आती गोंगों की आवाजों से आपा खो कर उसका वीर्य बह निकला.

"मां" अजय सीत्कारा "रुको, रुको.. रुक जाओ" अजय चिल्लाया. दीप्ति सब समझ गई. अजय छूटने वाला था. लन्ड की नसों मे बहते वीर्य का आभास पाकर दीप्ति ने अपना मुहं हटाय़ा और मुट्ठी में जकड़ कर अजय के लन्ड को पम्प करने लगीं. गुलाबी सुपाड़े में से वीर्य की धार छूट कर सीधे मां के चेहरे पर पड़ी. दीप्ति ने दोनो आंखें बन्द कर लीं. लन्ड से अजय का सड़का झरने की तरह बह निकला. दीप्ति का हाथ अजय के वीर्य से सना हुआ था. "बर्बाद" एक ही शब्द दीप्ति के दिमाग में घूम रहा था.

अभी तक झटके लेते लन्ड को दीप्ति ने निचोड़ निचोड़ कर खाली कर दिया. लड़के के मुहं से कराह निकली "मां, ये आपने क्या कर दिया?"

"वहीं, जो मुझे बहुत पहले कर देना चाहिये था" मां ने जवाब दिया "तुमको मेरी जरूरत है. ना कि किसी चाची या किसी भी ऐरी गैरी लड़की या औरत की" "तुम मेरे हो सिर्फ़ मेरे" उनके वाक्यों में गर्व मिश्रित अधिकार था. मां के हाथ, चेहरे और नाईटी अजय के वीर्य से सने हुये थे. दीप्ति ने अजय की जांघों पर सिमटी पड़ी चादर से चेहरा रगड़ कर साफ़ किया. अजय ने बिस्तर पर एक तरफ़ हटते हुये अपनी मां के लिये जगह बना ली. दीप्ति भी अजय के पास ही बिस्तर पर लेट गयी. खुद को इस तरह से व्यवस्थित किया की अजय का चेहरा ठीक उनके स्तनों के सामने हो और लन्ड उनके हाथ में. नाईट गाऊन के सारे बटन खोल कर दीप्ति ने उसे अपने बदन से आज़ादी दे दी.

अजय की आंखों के सामने मां की नन्गी जवानी बिखरी पड़ी थी. जबसे सैक्स शब्द का मतलब समझने लगा था उसकी मां ने कभी भी उसे अपने इस रूप का दर्शन नहीं दिया था. हां चाची के साथ जरूर किस्मत ने कई बार साथ दिया था. अजय का सिर पकड़ दीप्ति ने उसे अपने चूंचों मे छिपा लिया. अजय थोड़ा सा कुनमुनाया. "श्श्श्श". "मेरे बच्चे, तेरे लिये तेरी मां ही सब कुछ है. कोई चाची या कोई भी दूसरी औरत मेरी जगह नही ले सकती. समझे?"

अजय के होठों ने अपने आप ही मां के निप्पलों को ढूंढ लिया. जीवन में पहली बार ना सही लेकिन इस समय अपनी मां के शरीर से अपनी भूख मिटाने का ये अनोखा ही तरीका था. मां के दोनों निप्पल बुरी तरह से तने हुये थे. शायद बहुत उत्तेजित थी. अपने बेटे के लिये उसकी मां ने अपने आनन्द की परवाह भी ना की. अजय का मन दीप्ति के लिये प्यार और सम्मान से भर गया.

मां बेटे एक दूसरे से बेल की तरह लपटे पड़े थे. अजय का एक पावं दीप्ति की कमर को जकड़े था तो हाथ और होंठ मां के सख्त हुये मुम्मों पर मालिश कर रहे थे. लन्ड में भी धीरे धीरे जान लौटने लगी. पर दिन भर का थका अजय जल्दी ही अपनी ममतामयी मां के आगोश में सो गया.

दीप्ति थोड़ी सी हताश तो थी किन्तु अजय की जरुरतों को खुद से पहले पूरा करना उनकी आदत में था. खुद की टांगों के बीच में आग ही लगी थी पर अजय को जन्मजात अवस्था में खुद से लिपटा कर सोना उसे सुख दे रहा था. थोङी देर में दीप्ति भी नींद के आगोश में समा गयी. जो कुछ भी उन दोनों के बीच हुआ वो तो एक बड़े खेल की शुरुआत भर था. एक ऐसा खेल जो इस घर में अब हर रात खेला जाने वाला था.

अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति--पार्ट -6

पिछले चौबीस घन्टों में अपने ही घर की दो सीधी सादी दिखने वाली भद्र महिलाओं के साथ हुये उसके अनुभव को याद करके अजय का लन्ड फ़िर तेजी से सिर उठाने लगा. बिस्तर पर उसकी मां दीप्ति जन्मजात नन्गी अवस्था में उसकी बाहों में पड़ी हुयीं थीं. मां के कड़े निप्पलों को याद करके अजय का हाथ अपने आप ही दीप्ति के चूचों पर पहुंच गया. हथेली में एक चूचें को भर कर अजय हौले हौले से दबाने लगा. शायद मां जाग जाये और क्या पता खुद को चोदने भी दे. आज की रात वो किसी औरत के जिस्म को बिना चोदे रह नहीं पायेगा.

अजय ने धीरे से मां की तरफ़ करवट बदलते हुये अपना लन्ड उनके भारी नितंबों की दरार में घुसेड़ दिया. अपनी गांड पर दबाब पाकर मां की आंखें खुल गईं.

"अजय, ये क्या कर रहे हो?", दीप्ति मां बुदबुदाईं.

क्य बोलता बिचारा की मां मैं तुम्हे चोदना चाहता हूं. क्या आप में से कोई भी ये बात कभी भी अपनी मां से कह पायेगा? नहीं ना? अजय ने जवाब में अपने गरम तपते होंठों से दीप्ति के कानों को चूमा. बस. इतना करना ही काफ़ी था उस उत्तेजना से पागल हुई औरत के लिये. दीप्ति ने खुद पेट के बल लेटते हुये अजय के हाथों को खींच कर अपनी झांटो के पास रखा और एक पैर सिकोड़ कर घुटना मोड़ते हुये उसे अपनी बुरी तरह गीली हुई चूत के दर्शन कराये. अजय ने मां की झांटो भरी चूत पर उन्गलियां फ़िराई. परन्तु अनुभवहीनता के कारण ना तो वो उन बालों को अपने रास्ते से हटा पा रहा था ना ही मां की चूत में अन्दर तक उन्गली करने का साहस कर पा रहा था.

Text size
Theme