चुदाई की कमी से परेशान मामी को खुश किया

चुदाई की कमी से परेशान मामी को खुश किया

मामी चुदाई कहानी में मैं मामा के घर गया. मामा लकवे से ग्रसित थे. मामी की जवानी उनके जिस्म से टपकती थी. मैंने उनसे मजाक में पूछ लिया.

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राजेश है, मेरी उम्र 23 वर्ष है और मैं औरैया के सरकारी बैंक में कार्यरत हूं।

ये कहानी मेरी और मेरी रिदिमा मामी की है।

मामी की उम्र लगभग 40 होगी लेकिन दिखने में 30 की भी नहीं है।

मामी का रंग गेहुआं, वो सुडौल बदन वाली ग्रामीण परिवेश की महिला है।

उनकी गांड चौड़ी और बड़े-बड़े बूब्स हैं।

ये मामी चुदाई कहानी आज से 6 महीने पुरानी है जब मुझे अपने ननिहाल में शादी में जाना था।

ननिहाल मेरे दफ्तर से पास होने के कारण मुझे अकेले ही जाने को कहा गया और सुरेश मामा के परिवार के लिए कुछ कपड़े उपहार स्वरूप ले जाने के लिए भी कहा गया।

रिदिमा मामी सुरेश मामा की ही पत्नी हैं।

सुरेश मामा को 5 वर्ष पहले लकवा मार गया था।

तब से वो बस बिस्तर पर ही लेटे रहते हैं।

शाम के समय मैं रिदिमा मामी के घर पहुंचा और मामा-मामी से मिला।

मामा के बच्चे अपने ननिहाल में रह कर पढ़ाई करते हैं इसलिए घर पर सिर्फ मामा और मामी ही रहते हैं।

मैं मामा के पास जा कर बैठ गया और मामी भी वहीं नाश्ता लेकर आ गईं और बैठ गईं।

मैं मामी से मामा के हाल-चाल पूछने लगा।

इससे पहले मेरे मन में कभी भी रिदिमा मामी के लिए गलत विचार नहीं आए थे।

मैं, “और मामी जी, कैसे हैं मामा जी?”

मामी, “बस बेटा, जब तक भगवान की इच्छा है!”

मैं, “मामी जी, आप ऐसा क्यों बोल रही हैं?”

मामी, “बेटा, 5 साल हो गए और अब तो डॉक्टर भी जवाब देने लगे हैं!”

मैं, “मामी, ऐसे हिम्मत हारने से कुछ नहीं होगा! ये देखिए माता जी ने आप सबके लिए उपहार भेजे हैं और बोला है कि यही पहन कर आज शादी में जाना है सबको!”

मैंने सारे कपड़े मामी को देते हुए बोला और वो ये देख कर रोने लगी।

उनको रोती देख कर मैंने सांत्वना देने के लिए अपने सीने से लगा लिया।

पहली बार मैंने उनके मोटे-मोटे बूब्स का स्पर्श महसूस किया और मेरा लंड हरकत करने लगा।

जैसे ही मैंने रिदिमा मामी को गले लगाया वो और जोर से रोने लगी और मुझसे चिपक गई।

अब मेरा लंड अपने पूरे आकार में आ चुका था और उसकी ये हरकत रिदिमा मामी ने भी देख ली थी।

थोड़ी देर बाद मामी शांत हुई और फिर हम दोनों इधर-उधर की बात करने लगे।

मैं, “बिना मामा की मदद के आप अकेले खेती का काम कैसे संभालती हैं मामी जी?”

मामी, “कभी मजदूरों को अकेले संभालती हूं तो कभी भाई आकर मदद कर देते हैं।”

मैंने हिम्मत करके बोला, “फिर तो आप काफी टाइम से हरी भी नहीं हुई होंगी?”

मामी चौंक कर मुझे देखती रह गई।

जिनको “हरी होना” नहीं पता उनको बता दूं कि ये मादा मवेशियों के गर्भाधान को कहा जाता है।

मामी अचंभे से पूछते हुए, “ये क्या कह रहे हो बेटा?”

मैं, “मामी, मैं तो मवेशियों के बारे में पूछ रहा था। आप क्या समझ रही थीं?”

मामी ने इतना सुनते ही कातिल मुस्कान से मुझे देखा और मैं समझ गया रिदिमा लंड खाने के लिए तैयार है।

मामी, “वैसे बेटा, हरी तो 5 साल से नहीं हुई है!”

मैं, “तो आज हरी कर दूं क्या मामी?”

इतना बोलते ही मैं रिदिमा के मोटे-मोटे बूब्स उसकी चोली के ऊपर से ही दबाने लगा और उसके रसीले लाल होठ कस कर चूमने लगा।

रिदिमा भी मेरे ऊपर आ गई और मेरे कपड़े उतारने लगी।

जैसे ही उसने मेरा पैंट खोला वैसे ही मेरा मूसल लंड उसके सामने आ गया।

अब मैंने उसकी साड़ी खोल दी और वो सिर्फ काली ब्रा-पैंटी में मेरे सामने खड़ी थी।

उसके बूब्स ब्रा से बाहर निकलने के लिए तड़प रहे थे।

फटाफट मैंने उसकी ब्रा उतारी।

पैंटी दांत से फाड़ कर चूत चाटना शुरू किया और रिदिमा की सिसकारियां चालू हो गईं।

मामा ने कभी उसकी चूत नहीं चाटी थी तो ये उसके लिए नया था और उसे बहुत मज़ा भी आ रहा था।

फिर हम दोनों 69 की पोजीशन में आए।

वो मेरा लंड अपने गले तक ले जा रही थी और मैं उसकी चूत चाटते हुए गांड में भी उंगली कर रहा था।

रिदिमा मेरा दोहरा वार सह न पाई और 5 मिनट में मेरे मुंह में झड़ गई।

मैं उसका सारा नमकीन रस पी गया और उसकी चूत को चाट-चाट कर चमका दिया।

अब रिदिमा को मैंने मामा के बगल में लेटने को बोला और वो भी बिना शर्माए तुरंत अपने पति के बगल में लेट कर किसी गैरमर्द का लंड लेने के लिए तैयार हो गई।

ये देख कर मैं पूछ बैठा, “रिदिमा, तू इतनी बड़ी रांड होगी ये मैंने सोचा नहीं था!”

रिदिमा, “क्यों बे हरामी! जब तुझे अपने मामा के बगल में उसकी बीवी को चोदने में शर्म नहीं आ रही तो मुझे क्यों आएगी? और वैसे भी तेरे मामा के औज़ार ने मुझे बस बच्चे दिए लेकिन खुशी कभी नहीं दी!”

इतना सुनते ही मैंने रिदिमा की टांगें उठा कर अपने कंधे पर रखीं और लंड उसकी चूत पर सेट किया।

काफी समय से चुदाई न होने की वजह से रिदिमा का छेद काफी टाइट हो गया था जैसे कुंवारी चूत।

मैंने हल्का सा धक्का दिया तो लंड का सुपाड़ा अंदर घुस गया लेकिन रिदिमा की चीख निकल गई और थोड़ा सा खू.न भी आ गया।

बिना लंड निकाले रिदिमा को शांत किया और धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करने लगा।

2 मिनट के बाद लंड ने अपने लिए रिदिमा की चूत में जगह बना ली थी।

अब मैं रिदिमा के चेहरे को मामा की तरफ करके उसे पेलता जा रहा था और उसको गाली देता जा रहा था, “देख रांड! कैसे गांड उठा कर अपने ही पति के सामने दूसरे मर्द से चुद रही है!”

रिदिमा भी गांड उठा-उठा कर चुदाई का मजा ले रही थी और बोली, “ये साला तो बस नाम का पति था मादरचोद! मर्द तो तू मिला है मुझे!”

इस बीच रिदिमा 2 बार और झड़ गई थी।

हम दोनों मामा को देखते हुए अपनी चुदाई का मजा लेने लगे।

10 मिनट चुदाई के बाद रिदिमा को पेट के बल लेटने के लिए बोला।

अब मैं बिस्तर पर चढ़ गया और रिदिमा को पेट के बल 1 तकिया के ऊपर लिटा दिया ताकि उसकी गांड ऊपर उठ जाए।

उसकी चूत को पीछे से चोदने से पहले मैंने लंड का सुपाड़ा उसकी गांड के छेद पर फिरा दिया।

रिदिमा को ये खेल भा गया और अब उसकी चूत चोदते हुए मैं उसकी गांड में उंगली करने लगा।

10 मिनट की कामक्रीड़ा के बाद मैं भी झड़ने ही वाला था तो मैंने रिदिमा से पूछा- पानी कहां गिराऊं?

तो उसने बोला- अंदर ही डाल दो। बहुत समय बाद किसी मर्द का अहसास मिलेगा उसको।

मैं उसके अंदर ही झड़ गया और उसके ऊपर ही लेट गया।

थोड़ी देर बाद जब हम उठे तो देखा कि मेरा माल उसकी चूत से टपक रहा है।

ये देख कर रिदिमा ने सारा माल उंगली से साफ किया और खा गई।

मामी चुदाई के बाद हम लोग शादी में जाने के लिए तैयार हुए।

लेकिन मैंने रिदिमा से कहा- अभी मेरा मन नहीं भरा है इसलिए बस शादी में शामिल होकर तुरंत वापस आएंगे हम लोग।

रिदिमा बिना झिझक के मान गई।

मैं और रिदिमा बाइक पर बैठ कर कार्यक्रम स्थल की ओर रवाना हुए।

बाइक पर भी रिदिमा अपने बूब्स मेरी पीठ पर दबा रही थी और मेरा लंड भी सहला रही थी।

शादी से आधे घंटे में वापस आने के बाद मैं रिदिमा को फिर मामा के कमरे में ले गया और अब उसकी साड़ी ऊपर करके उसकी गांड चाटने लगा।

वो बाकी कपड़े अपने आप खोलने लगी।

फिर 1 जोरदार झटके से उसकी साड़ी नीचे कर दी और अपने कपड़े उतारने लगा।

रिदिमा से मैंने सरसों का तेल गरम करने के लिए कहा और उसके साथ किचन में चला गया जहां पर पीछे से उसके बूब्स दबाता रहा जब तक वो तेल गरम कर रही थी।

तेल गरम होने के बाद थोड़ा तेल उसके बूब्स और निप्पल पर लगाया और उनके साथ खेलने लगा।

थोड़े तेल से रिदिमा से अपने लंड की मालिश करके मुठ मारने को बोल दिया।

रिदिमा जिस तरह से मालिश कर रही थी उससे लगा ही नहीं कि ये एक गृहणी के हाथ हैं।

जिस हिसाब से वो मालिश कर रही थी ऐसा लग रहा था कि न जाने कितनों की मुठ मारती है।

जब ये बात मैंने रिदिमा से पूछी तो बोली, “लकवे के बाद मैं कोशिश करती थी कि शायद तेरे मामा का लंड खड़ा हो जाए तो मेरा भी कुछ भला हो!”

कभी रिदिमा पूरा लंड मुंह में ले लेती तो कभी सिर्फ सुपाड़े को ही चूसती/चाटती रहती।

थोड़ा सा तेल उसने मेरे गोटों पर भी लगा दिया और अब एक हाथ से गोटों की मालिश करने लगी और एक हाथ में लंड पकड़ कर सिर्फ सुपाड़े के साथ खेलती।

बीच-बीच में हल्के से गोटों को भींच भी देती।

रिदिमा के हाथों के आगे मैं ज्यादा देर टिक नहीं पाया और सारा माल उसके मुंह में भर दिया।

इसके बाद रिदिमा को घोड़ी बनने को बोला और बचा हुआ तेल उसकी गांड के छेद पर लगा दिया और उंगली अंदर-बाहर करने लगा।

मेरे इरादे भांपते हुए रिदिमा बोली, “जानू, थोड़ा आराम से… मैंने कभी गांड नहीं मरवाई है!”

मैं बोला, “हर चीज का पहली बार होता है मेरी जान! और मैं तुम्हारी गांड का कुंवारापन लेकर तुमको अपनी मोहब्बत का हसीन तोहफा देना चाहता हूं!”

थोड़ा नानुकर करने के बाद रिदिमा मान गई और तब तक मैंने अच्छे से उसकी गांड में तेल भी लगा दिया था।

अब मैं पीछे आ कर उसकी गांड के छेद पर लंड सेट करने लगा।

पहले तो लंड अंदर गया ही नहीं।

फिर रिदिमा को थोड़ा और झुकाया तो उसकी गांड थोड़ी खुली।

अब थोड़ा लंड अंदर गया और रिदिमा का चीखना-चिल्लाना भी शुरू हो गया, “प्लीज जानू, गांड मत मारो…. चाहो तो चूत ले लो लेकिन गांड मत मारो… बहुत दर्द हो रहा है… मत मारो… जाने दो मुझे!”

हालत देखते हुए गांड पर थोड़ा और तेल लगाया और थोड़ा अपने लंड पर भी।

इसके बाद दोबारा कोशिश करने पर आधा लंड घुस गया।

अब रिदिमा भी ठीक थी और चुदवाने के लिए तैयार थी।

5 मिनट धीरे चुदाई के बाद रिदिमा को मजा आने लगा।

इसके साथ ही वो अपनी चूत में उंगली करने लगी।

ये देख कर अब मैं 1 धक्का उसकी गांड में मारता और दूसरा धक्का उसकी चूत में।

मेरा ये नया वार फिर रिदिमा से बर्दाश्त नहीं हुआ और एक के बाद एक करके वो कई बार झड़ गई।

इसी तरह आधे घंटे की गांड चुदाई के बाद मैं रिदिमा की गांड में झड़ गया।

उस रात और अगले दिन सुबह जब तक बारात विदाई होकर नहीं आई, तब तक कई बार चुदाई करी हम लोगों ने!

और कई बार तो रिदिमा की चूत का रस मामा के ऊपर भी गिर गया।

उस दिन के बाद से रिदिमा का जब भी मन होता है चुदाई का तो वो मेरे कमरे पर चली आती है नहीं तो हर सप्ताहांत मैं उसे ले आता हूं।

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