कमसिन भांजी अधेड़ मामा - भाग १

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कमसिन भांजी अधेड़ मामा - भाग १

कमसिन भांजी अधेड़ मामा

मैं अभी पुणे में एक कंपनी में जॉब करता हूँ।मेरी उम्र लगभग ४० साल है और यह बात बात तब की है जब मैं एक कोर्स के सिलसिले में अपनी दीदी जीजा के घर पर रायपुर गया था। वहाँ मैं कुछ महीने तक रहा, तब मैंने मुठ मार कर ही गुजारा किया था क्योंकि पुणे में तो मुझे रंडी की चूत सस्ते दाम में मिल जाती थी और घर में मेरी बीवी भी थी तो चूत की कोई कमी नहीं थी.

पर रायपुर में मेरी कोई सेटिंग नहीं थी और वो मेरी दीदी का घर था तो चुदाई का तो कोई साधन भी नहीं था.

मेरे जीजा की एक बड़ी बेटी भी है जिसका नाम रिंकी है, मेरी वो भांजी उस समय स्कूल में 12 क्लास में पढ़ रही थी, उसकी हाइट 5'5″ होगी, दूध की तरह एकदम गोरा रंग और फिगर साली का एकदम लंड खड़ा कर देने वाला था 38 28 38। यारों अब आप ही सोच लो जब वो टॉप और मिनी स्कर्ट पहनती होगी तो क्या जलवे बिखेरती होगी ।

मैं सेक्स के लिए मरा जा रहा था. तो मेरी नजर अपनी भांजी पर ही पड़ गयी. हालाँकि वो मेरे बच्चों जैसी थी और हम दोनों की उम्र में भी बहुत ज्यादा अंतर था. कहाँ में ४० साल का हट्टा कट्टा मर्द और कहाँ वो कमसिन कली जिस ने पता नहीं अभी तक लौड़े का स्वाद भी देखा था या नहीं.

हालाँकि बाद में मुझे पता चला की रिंकी मेरी भांजी, सेक्स के लिए बहुत उत्सुक थी. वो अपनी ऊँगली और खीरा आदि से खूब मजे लेती थी और चुदाई करवाना भी चाहती थी पर उसे अभी तक एक मोटे लण्ड से चुदवाने का शुभ अवसर नहीं मिला था. उस ने अपनी सील तो खीरे से तोड़ ली थी पर लौड़े के लिए तरस रही थी.

वो थोड़ी डरपोक किस्म की लड़की थी तो किसी लड़के से सेक्स सम्बन्ध बनाने से डरती थी. यही मेरे लिए मौका बन गया.

क्योंकि मैंने उसे कई बार अपने कमरे में छुप कर ऊँगली करते देखा था, तो मुझे पता था की लौंडिया मस्ती के लिए तैयार है. पर समस्या थी हमारी उम्र की. मैं उस का मामा लगता था. पर मैंने कई बार उसकी छातियों को देखा था और उसे चलते हुए देख कर उसकी गांड को भी जी भर के देखा था.

कहते हैं की लड़की अपने शरीर पर घूम रही मर्द की नजरों को तुरंत पहचान लेती है. तो रिंकी चाहे मुझे से कितनी भी छोटी थी पर वो मेरी नजरों में छिपी वासना को समज गयी थी. मेरा उस से सेक्स सम्बन्ध का तो कोई जुगाड़ नहीं था पर क्योंकि उसने कभी किसी मर्द से चुदवाया नहीं था तो उसे भी मेरे वासना के बर्ताव से इतनी नाराजगी नहीं थी. शायद मन ही मन में वो कहीं खुश भी थी, कि चलो चाहे उस के बाप की उम्र का उसका मामा ही सही पर कोई मर्द तो उस पर इस तरह की नजर रखता है.

कई बार मैं उसे घर के काम करते हुए मैं अपना हाथ उसकी गांड पर रगड़ देता था, तो वो थोड़ा सा हिल जाती थी। मेरा ट्रेनिंग 12 बजे से 4 बजे तक होता था और रिंकी का भी कॉलेज 12.30 से होता था। और मेरे दीदी के लड़कों का सुबह 7 बजे से 2 बजे तक था, और जीजा जी भी 8.30 को ऑफिस के लिए रोज निकल जाते थे।

घर में सिर्फ मैं, मेरी दीदी, और रिंकी ही रहते थे। मैं अपने ऊपर वाले कमरे में 11.30 बजे तक पढ़ता था और दीदी और रिंकी घर की सफाई करते थे। मेरी दीदी कपड़े धोने के लिए नीचे आंगन में आकर कपड़े धोती थी। जो कि मेरे ऊपर वाले रूम के पीछे वाले दरवाजे से नीचे की ओर एकदम साफ-साफ दिखाई देता था। बाद में लगभग 11 बजे मैं अपनी ट्रेनिंग को निकल जाता था तो अक्सर रिंकी भी मेरे साथ ही स्कूल चली जाती थी क्योंकि उस का स्कूल मेरे ट्रेनिंग सेंटर के रास्ते में ही पड़ता था.

और दीदी रोज कपड़े धोने के बाद वहीं पर अपनी मैक्सी (नाइट गाउन) निकाल कर नहाने लगती थी। दीदी नंगी ही नहाती थी. शायद मेरे आने से पहले से ही उसकी एहि आदत थी. तब तो घर में सिर्फ वो और उसकी बेटी रिंकी ही होते थे, तो कोई दिक्कत नहीं थी. तो दीदी की यही आदत मेरे आने के बाद में भी चलती रही. उसे मालूम ही नहीं था की जब वो नंगी नहाती है तो ऊपर के कमरे की खिड़की से मुझे वो नजारा पूरा दिखाई देता है. परदे के पीछे से छुप कर मैं ये नजारा रोज देखा करता था और रोज-रोज दीदी के बड़े-बड़े मम्मे और उनकी सेक्सी सी चूत को देख के अपने 7 इंच के लंबे लंड को पकड़ के हिलाता था। और सारा स्पर्म किसी न्यूज़पेपर में गिरा के फेंक देता था।

जब दीदी चली जाती थी तो घर में मैं और सिर्फ रिंकी ही बचते थे। और रिंकी रोज 10.00 बजे नहाने जाती थी, वो अपने बाथरूम में नहाती थी जो मेरे कमरे और रिंकी के कमरे के बीच में था. हमारे बाथरूम में एक दीवार के कोने में छोटा सा रोशनदान बना हुआ है। जैसे ही रिंकी नहाने के लिए बाथरूम जाती थी मैं जल्दी से एक चेयर लगा के उस विंडो से उसे देखा करता था। ओह्ह्ह्ह्ह भगवान् वो गोरा बदन और उसके बड़े-बड़े दोनों मम्मे और उसपे पिंक कलर का निप्पल।

यार मैं तो देख के पागल हो जाता था, और जब नीचे देखता था तब तो यार, वो उसकी चूत की लिप्स दोनों एकदम टाइट-टाइट थीं और दोनों चिपक के एकदम फूले हुए थे। मैं हमेशा उसके गोरे सेक्सी बदन को देख कर अपने मोटे और 7 इंच के लंड को हाथों में पकड़ के जोर-जोर से हिलाता था। और करीब 15-20 मिनट हिलाने के बाद मेरा सारा रस निकल जाता था, और एकदम रिलैक्स फील होता था। और मैं उस स्पर्म को एक पेपर में लपेट के कहीं भी फेंक देता था।

ऐसे ही काफी देर तक चलता रहा। मैं अपनी दीदी और अपनी रिंकी को नंगा देख-देख कर अपने आप को कंट्रोल में रखता था। और मैं किसी ना किसी बहाने से रिंकी के गांड पे अपने हाथ को भी रगड़ देता था लेकिन वो कभी कुछ भी नहीं बोलती थी और मैं हमेशा उसके दोनों मम्मे को भी घूरता रहता था। और जब वो कॉलेज के लिए तैयार होती तो मेरा भी वही टाइम था जाने का, तो हम दोनों इक्कठे जाते थे और वो मुझसे हमेशा पूछा करती थी कि आज मैं कैसी लग रही हूँ।

और मैं हमेशा उसे अच्छे-अच्छे कॉम्प्लिमेंट दे कर खुश कर देता था। कभी कहता कि रिंकी तुम आज हॉट लग रही हो तो कभी कहता कि तुम बहुत ज्यादा सेक्सी लग रही हो आदि। और वो बहुत खुश हो जाया करती थी, और हम दोनों साथ में ही निकलते थे। कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा।

हम दोनों मामा भांजी या तो स्कूटी से जाते थे या बाइक से. जब रिंकी मेरे पीछे बैठती थी तो उसके दोनों मम्मे मेरी पीठ में लग जाते थे और मुझे खूब मजा आता था. यदि कभी रिंकी थोड़ा पीछे हट कर भी बैठी होती तो मैं जान बूझ कर बाइक में ब्रेक लगा देता ताकि वो खिसक कर मेरे साथ चिपक जाये.

मुझे लगता है कि रिंकी को भी मेरी इस शरारत का पता था, पर उस ने कभी इतराज नहीं किया और मुझे रोज अपनी चूचियों के स्पर्श का मजा देती थी. मुझे लगता है कि इस सब में उसे भी मजा आता था. मैं उस से उम्र में बहुत बड़ा और रिश्ते में उसका मामा था पर क्योंकि उसका कोई बॉय फ्रेंड नहीं था और उस पर भी जवानी की मस्ती चढ़ रही थी तो जो हाथ आया वही खजाना के मुहावरे के अनुसार मेरे से हे मजे ले रही थी,

एक दिन उसने मुझसे बोला कि मामा आज कॉलेज में छूटी है तो चलो आज कोई मूवी देखने चलते हैं।

दीदी को भी कोई इतराज नहीं था. क्योंकि वो मेरी छोटी सी भांजी थी और मेरे से तो बहुत छोटी थी. तो उन्होंने आज्ञा दे दी. फिर हम दोनों 12 से 3 का शो देखने चले गए वहाँ पर जैसे ही हमने पिक्चर हॉल में एंटर किया एकदम अंधेरा था। हम दोनों अपने-अपने सीट पर बैठ गए। हमारे जस्ट आगे वाली सीट पे एक कपल बैठ हुआ था, मूवी स्टार्ट हो गई। करीब 15-20 मिनट बाद वो दोनों कपल किसिंग करने लगे, और उसी समय मूवी में भी सेक्सी डांस चल रहा था। मैं और रिंकी कभी उन दोनों को देख रहे थे और फिर कभी एक-दूसरे को।

और वो दोनों कपल एक-दूसरे को पागलों की तरह किस किये जा रहे थे। फिर लड़की ने लड़के का लण्ड उसकी पैंट से बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगी. अँधेरे के कारण साफ़ तो नहीं दिख रहा था. पर यह पता चल रहा था कि क्या हो रहा है.

थोड़ी देर के बाद लड़के ने लड़की का सर पकड़ कर अपनी गोद में झुका लिया और लड़की उसके लौड़े को चूसने लगी. उसका ऊपर नीचे होता हुआ सर देख कर साफ़ पता चल रहा था की वो उसका लौड़ा चूस रही है. लड़के ने भी उसकी शर्ट ऊपर करके उसके मुम्मे बाहर निकाल लिए थे और उन्हें मसल रहा था. बहुत ही सेक्सी दृश्य था. जब भी किसी सीन में स्क्रीन पर थोड़ी रौशनी होती तो लण्ड चूसती हुई लड़की और उसके मुम्मे साफ़ दिखाई पड़ जाते थे. पर उन दोनों को कोई शर्म लिहाज नहीं थी क्योंकि असल में आज कल के लड़के लड़किआ सिनेमा में यही सब करने तो आते हैं.

ये सब देखा के मेरा लंड एकदम कड़क हो के खड़ा हो गया था। मेरी भांजी रिंकी का भी यह सब देख कर बुरा हाल था. बेचारी का मामा साथ में था तो कुछ बोल भी नहीं सकती थी और देखती रही. मेरा लौड़ा भी तन गया था जिसे में पैंट के अंदर दबा कर सेट कर रहा था. रिंकी तिरछी नजरों से मुझे अपना लण्ड ठीक करते देख रही थी और शर्मा रही थी. वो भी काफी गर्म हो चुकी थी पर वो भी बेचारी क्या करती, मैं उसका मामा साथ में था तो ना तो वो उठ कर जा सकती थी न ही अपनी चूत को रगड़ सकती थी.

खैर ये सब देखते-देखते 3 घंटे खत्म हो गए और हम मूवी हॉल से बाहर आ गए। लेकिन मूवी हॉल से बाहर आने के बाद हम दोनों में कुछ-कुछ चेंज आ गया था, रिंकी मुझसे थोड़ा बोल्ड हो कर बातें करने लगी थी।

रिंकी: मामा! वो लड़का लड़की तो एकदम पागल हो गए थे।

(मैं ये सुन कर मैं थोड़ा हैरान तो था लेकिन काफी खुश भी था)

मैं: हाँ सच में पूरे 3 घंटे उन्होंने सिर्फ किसिंग और मजे ही करते रहे।

रिंकी: तो क्या और भी कुछ करना चाहिए था क्या?

मैं: नहीं मैं तो बस ऐसे ही बोल रहा हूँ। और कुछ कर भी क्या सकते थे, आखिर सिनेमा हाल में थे और कितने लोग आस पास थे, तो इस से ज्यादा और क्या कर लेते बेचारे.

रिंकी :- हूँ बेचारे कहाँ थे वो. कितने गंदे थे और कितने गंदे काम कर रहे थे.

मैंने मौका संभालते कहा :_ रिंकी! तुम्हे कैसे पता कि वो गन्दा काम कर रहे थे. शायद उन्हें अच्छा लग रहा हो तभी तो वो फिल्म न देख कर सिर्फ यही करते रहे.

वैसे मुझे लगता है कि उन के पास कोई पॉपकॉर्न वगैरा का पैकेट होगा जो उस लड़के ने अपनी गोद में रखा था. क्योंकि लड़की उसकी गोद में मुंह करके कुछ कर रही थी,तुम्हे क्या लगता है कि वो क्या खा रही होगी?

रिंकी बेचारी शर्मा गयी. जानती तो वो भी थी की लड़की क्या कर रही थी. तो बात को टालते बोली

"मामा! वो पॉपकॉर्न थोड़े खा रही थी. उसका मुंह तो लड़के की गोद में था. पॉपकॉर्न के लिए मुंह इतना नीचे करने की क्या जरूरत थी?"

मैं समझ गया की लोंड़िया मजा कर रही है और नाराज नहीं है तो मैं बात को आगे बढ़ाते बोला

"यदि पॉपकॉर्न नहीं था तो या फिर शायद कोई कुल्फी या आइसक्रीम होगी जो लड़के ने अपनी गोद में राखी होगी और लड़की उसके गोद में से उसे चूस रही होगी. क्योंकि उस लड़की का मुंह ऊपर नीचे जो हो रहा था."

रिंकी को बहुत शर्म आ रही थी. बोलती तो क्या बोलती? वो बात को टालते बोली

"मामा छोडो हमें क्या लेना. वो लड़की चाहे आइसक्रीम खाये चाहे कुल्फी चूसे, उनकी मर्जी। आप चलो घर चलते हैं."

रिंकी के गाल शर्म से लाल हो चुके थे. वो चाहे अभी बच्ची ही थी पर आज कल की लड़कियां समझती तो सब हैं. तो घर चलने की बात कर रही थी.

मुझे भी इस छेड़छाड़ में मझा आ रहा था तो फिर छेड़ता हुआ बोला

"रिंकी! अगली बार जब हम मूवी देखने आएंगे तो हम भी आइसक्रीम ले आएंगे और तुम भी खाना. वैसे तुम आइसक्रीम खाना चाहोगी या कुल्फी चूसना? मैं वही दे दूंगा तुम्हे."

अब मैंने सीधे सीधे अपनी भांजी को लौड़ा चूसने का ऑफर दे दिया था.

रिंकी का तो शर्म से बुरा हाल था. बेचारी को कुछ नहीं सूझा कि क्या जवाब दे. तो बस चलते हुए बोली

"मामा आप तो बिलकुल ही बेशर्म हो गए हो. जब मूवी देखने आएंगे तो सोचा जायेगा. अब जल्दी से घर चलो. पर पहले मुझे बाथरूम जाना है."

मैं समझ गया की सेक्सी बातें करने से लड़की की चूत में पानी आ गया है. तो पेशाब करेगी या फिर चूत में ऊँगली भी कर सकती है.

मैं रिंकी को बाथरूम ले गया. रिंकी काफी देर के बाद आयी. चेहरा लाल और कुछ थकी लग रही थी. शायद चूत में ऊँगली करके आयी थी.

मैं फिर उसे छेड़ते बोला.

"अरे रिंकी! बाथरूम में काफी देर लगा दी. मैं तो डर ही गया था. क्या कर रही थी?"

रिंकी बोलती भी तो क्या बोलती? बेचारी चुप रही. वो समझ रही थी की अगर उसने कुछ बोला तो फिर मैं आगे से पता नहीं क्या बोल दूँ. तो चुप हो रही,

बेचारी शर्मा गयी. बेचारी बोलती तो बोलती भी क्या। मैं उसका मामा और उसके बाप की उम्र का जो था.

उसके बाद हम अपनी स्कूटी पे बैठे और घर आ गए। घर आने के बाद हमारे दिमाग में वही सब सीन चल रहा था। मैं अब और पागल होता जा रहा था। मुझे अब किसी भी कीमत पे रिंकी को चोदना ही था चाहे जो हो जाये। लेकिन कैसे पहला स्टेप लूं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

जैसे कि मैंने आप को पहले भी बताया था कि मैं अक्सर अपनी दीदी को नीचे आँगन में नंगी नहाते देखता था और मुठ मारता था. दीदी या रिंकी को इस बात का कोई पता नहीं था. मैं रिंकी को उसके बाथरूम में नहाते देखता था और अपनी दीदी को आँगन में.

मुठ मारने के समय मैं एक पेपर अपने पास रख लेता था और अपना माल उसमे ही निकाल देता था. फिर उस पेपर को मौका देख कर कहीं फेंक देता था.

फिर एक दिन गलती से मैंने जो स्पर्म से लिपटा हुआ पेपर मेरे एक पैंट की पॉकेट में ही रह गया था और जब रिंकी ने कपड़े धोने के लिए पैंट चेक किया तो उसे वो पेपर मिल गया। लड़की समझदार थी तो माल की खुशबू से ही समझ गयी की यह पेपर में क्या लगा है. उसे मुझे छेड़ने का मौका मिल गया।

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