दीदी
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. ### उस ऐतिहासिक हवेली के विशाल शयनकक्ष में संध्या के ढलते ही एक अनूठा, सघन और मादक सन्नाटा पसर गया था। बाहर अवध की पुरानी गलियों में इक्के-दुक्के गुजरते कदमों की आहटें और दूर किसी मक़बरे की मीनार से आती अज़ान की गूँज हवा में तैर रही थी, किंतु भीतर का संसार इन…

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  1. भाग १