गाँव में मेरी गैंगबैंग चुदाई - भाग १

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गाँव में मेरी गैंगबैंग चुदाई - भाग १

गाँव में मेरी गैंगबैंग चुदाई

लेखिका: रेहाना हुसैन

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मेरा नाम रेहाना हुसैन है। मेरी उम्र तीस साल है और मेरा फिगर ३६-२६-३४ है। जब भी मैं कहीं बाहर जाती हूँ तो सभी मर्द मुझे कामुक नज़रों से देखते हैं। मुझे भी ये बहुत पसंद है कि सभी मर्द मुझे देखें। मेरे निकाह को पाँच साल हो गये हैं और मेरे शौहर दुबई में रह कर नौकरी करते हैं। साल में एक-दो बार घर आना हो पाता है वो भी हफ्ते या दो हफ्ते के लिये। जब भी मेरे शौहर आते थे तो हम दोनों जम कर चुदाई करते थे लेकिन उनके जाने के बाद मैं चुदाई के लिये बहुत भूखी हो जाती थी। मोमबत्तियों और खीरे जैसी बे-जान चीज़ों का सहारा लेना पड़ता था लेकिन तसल्ली नहीं हो पाती थी।

इसलिये मैंने सोचा कि इस तरह तड़पने से तो अच्छा है कि क्यों ना किसी और मर्द से चुदवा लूँ। पहले तो मैंने बहुत सोचा कि ये गलत है पर क्या करती… चूत मान ही नहीं रही थी मेरी। चूत को तो लन्ड चाहिये थे बस। दिन - रात मैं हर वक्त बस चुदाई के बारे में सोचने लगी। किसी और चीज़ में मन ही नहीं लगता। चाहे कोई भी हो मैं हर मर्द को गंदी नज़रों से ही देखती। मेरी नज़र हमेशा मर्दों की टाँगों के बीच में ही जम जाती थी। हद ये हो गयी थी कि कोई जानवर भी दिख जाता तो नज़रें उसके लन्ड को ही ढूँढतीं।

इसलिये मैंने सोच लिया था कि अब तो किसी ना किसी का लन्ड जरूर लूँगी। मुश्किल ये थी कि किस से चुदवाया जाये तो इस बारे में मैंने अपनी सहेली से बात करने की सोची। उसका शौहर भी दूसरे मुल्क में नौकरी करता था तो इसलिये वो अक्सर गैर-मर्दों से चुदवाया करती है। मेरी सहेली का नाम रुबिना है और उसकी उम्र बत्तीस साल है और दिखने में वो भी काफी सैक्सी है पर मेरे से कम सैक्सी और हॉट है वो। हम दोनों कॉलेज में साथ थीं और नये-नये यारों से चुदवाती थीं और खूब मौज-मस्ती करती थीं।

एक दिन मैं उसके घर गयी। हम दोनों बैठी पैग लगा रही थीं तो दो पैग पीने के बाद मैंने उससे इस बारे में ज़िक्र किया। उसने कहा कि चुदाई के लिये वो मुझे अपने एक यार से मिलवा देगी। उसने मुझे बताया कि उसके सभी यार गुँडे मवाली किस्म के हैं। मैंने उससे पूछा कि तूने ऐसे यार क्यों बनाये तो उसने कहा कि ऐसे मर्दों से चुदवाना उसे अच्छा लगता है और उनमें जोश भी ज्यादा होता है और वो जम कर चोदते हैं जिससे उसकी पूरी तरह तसल्ली हो जाती है। मुझमें तो चुदाई की भूख थी तो मैंने कहा जैसा मरज़ी मर्द हो... मुझे तो लन्ड चाहिये बस और वो भी उसी वक्त। इस कहानी की लेखिका रेहाना हुसैन है!

तभी उसने अपने एक यार को फोन लगाया और उससे मेरी बात की और कहा कि अभी नयी चूत चोदनी है क्या? उसके यार का नाम विशाल था। विशाल ने कहा कि वो तैयार है और अभी आ जायेगा मुझे लेने के लिये। मैं बहुत नर्वस थी क्योंकि मैं पहली बार किसी और से चुदवाने जा रही थी शादी के बाद। और करती भी क्या... इतनी चुदासी थी कि मुझे तो लन्ड चाहिये थे बस। मैंने खुद को रिलैक्स करने के लिये एक और तगड़ा पैग लगाया।

तकरीबन ५० मिनट बाद विशाल मुझे लेने के लिये आ गया। उसकी उम्र तकरीबन २३-२४ साल की होगी और उसका जिस्म भी बहुत हट्टा-कट्टा और गठीला था। उसकी हाइट ६ फीट होगी। उसने आते ही रुबीना को किस किया और उसके बोब्बे उसके कपड़ों के ऊपर से ही दबाने लग पड़ा। उसके बाद उसने मुझे अपने साथ चलने को कहा तो मैंने रुबीना को बॉय कहा और उसकी गाड़ी में जा कर बैठ गयी। मुझे लन्ड लेने की इतनी जल्दी थी कि उससे पूछा भी नहीं कि कहाँ जा रहे हैं। हम पहले नॉर्मल बातें करते रहे। मैं रुबिना के घर पर शराब के तीन पैग पी कर निकली थी और मुझ पर नशा सवार होने लगा था और मेरा मूड बहुत ज्यादा सैक्सी हो गया था। मैंने बिल्कुल बेशरम होकर उसकी जाँघ पर हाथ रख दिया और उसकी जीन्स के ऊपर से ही मैं उसके लन्ड को सहलाने लगी।इस कहानी की लेखिका रेहाना हुसैन है!

ये सब देख कर उसका लन्ड भी कड़ा हो गया। विशाल ने अपनी कार सड़क के एक किनारे पर रोक ली। तभी हम दोनों एक दूसरे को किस करने लग पड़े। हमारी दोनों की जीभें एक दूसरे के मुँह में थी और मुझे वो बहुत उत्तेजित लग रहा था। उसने मुझे अपने कपड़े उतारने को कहा। मैंने उससे कहा कि यहाँ सड़क पर कोई देख लेगा तो उसने कहा कि ये सड़क एक सुनसान सड़क है जहाँ ट्रैफिक कम ही होता था और शाम के वक्त यहाँ कोई नहीं आता जाता है। मैंने दोनों तरफ़ देखा तो कोई भी नहीं था दूर-दूर तक।

वैसे भी नशे की खुमारी और उत्तेजना में मुझे चुदाई करने के अलावा कुछ नहीं सूझ रहा था। मैंने फौरन अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये। मैं अपने कपड़े धीरे-धीरे उतार रही थी तो इस बात पर विशाल को गुस्सा आ गया और उसने एक दम से मेरे सूट की कमीज़ खींच कर आधी फाड़ कर उतार दी और कहने लगा साली इतनी देर क्यों लगा रही है जल्दी कर! मेरे सूट की कमीज़ अब काफी हद तक फट चूकी थी और मैंने ब्रा भी नहीं पहनी हुई थी। उसके बाद विशाल के तेवर देखते हुए मैंने अपने सैंडल खोले बगैर ही जल्दी से अपनी सलवार और पैंटी भी उतार दी। विशाल भी नीचे से पूरा नंगा था। इस कहानी की लेखिका रेहाना हुसैन है!

उसका नौ इंच का लन्ड देख कर मैं हैरान हो गयी क्योंकि इतना बड़ा लन्ड हकीकत में मैंने पहली बार देखा था। तभी विशाल ने मुझे कहा, “साली रंडी अब इसे देखती ही रहेगी क्या? चल साली रंडी इसे अपने मुँह में डाल और अच्छी तरह से चूस इसको!” अब विशाल मेरे से एक दम टपोरी वाली ज़ुबान में बात कर रहा था। मैंने तभी उसका लन्ड चूसना चालू कर दिया। मुझे लन्ड चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था। मैं तकरीबन दस मिनट तक उसका लन्ड चूसती रही। तब तक मेरी चूत गीली हो चूकी थी। अब मैं उसका लन्ड चूत में लेना चाहती थी पर कार में जगह कम होने की वजह उसने मुझे कहा कि वो मुझको बाहर चोदेगा। हम दोनों कार के बाहर आ गये। उसने मेरी चूत में अपना लन्ड डाल दिया और मुझे चोदने लग पड़ा। वो पहले धीरे-धीरे से और फ़िर वो और तेज हो गया। जैसे-जैसे उसका लन्ड मेरे अंदर जा रहा था मुझे और मज़ा आ रहा था। सिर्फ ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने मैं पूरी नंगी हो कर सड़क के किनारे पर चुद रही थी।

मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं कभी ऐसे भी चुदवाऊँगी। तकरीबन बीस-पच्चीस मिनट तक चोदने के बाद उसका माल निकल गया और उसने अपना सारा माल मेरे जिस्म पर गिरा दिया। मुझे चुदाई करने में बहुत मज़ा आया था पर मेरी अभी तक पूरी तरह से तसल्ली नहीं हुई थी। उसने मुझे अपने कपड़े पहनने को कहा तो मैंने उससे कहा- “अभी मुझे और चुदवाना है।” विशाल बोला, “साली रंडी! लगता है तूने लन्ड नहीं लिया बहुत समय से...?” तो मैंने कहा कि “हाँ! मैंने बहुत वक्त से लन्ड नहीं लिया है।”

विशाल ने कहा कि अगर मुझे और चुदना है तो अपने दोस्तों से चुदवा देगा क्योंकि अब वो और नहीं चोद सकता क्योंकि वो पहले ही सुबह से पाँच औरतों को चोद चुका है और इसलिये थक गया है। मैं नशे में थी। मैंने कहा, “मुझे लन्ड चाहिये बस!” विशाल ने कहा, “लेकिन एक शर्त है!” मैंने कहा कि मुझे उसकी सब शर्तें मंज़ूर हैं बस मेरी चूत की प्यास किसी तरह शाँत करवा दे। वो बोला, “सोच ले... मेरी और मेरे दोस्तों की हर बात माननी पड़ेगी... हम जैसे चाहें तुझे चोदेंगे और तू मना नहीं करेगी!” कहाँ तो मैं एक मर्द से चुदने के लिये इतनी तड़प रही थी और अब मुझे दो-तीन लण्ड मिलने वाले थे। मैंने बिना सोचे खुशी-खुशी हाँ कर दी। वो बोला, “चल साली रंडी... कार में बैठ जा जल्दी... तुझे और लन्ड दिलवाता हूँ!” वो मुझे अपनी कार में अपने घर ले कर जाने लगा। तकरीबन एक घंटे के बाद हम उसके गाँव में पहुँच गये।

उसका घर एक गाँव में था जहाँ बहुत कम घर थे और वहाँ पहुँचते हुए रात के आठ बज चुके थे और पूरी तरह से अंधेरा हो गया था। उसने मुझे बताया कि जहाँ पर उसका घर है वहाँ उस तरफ़ के इलाके में कोई औरत नहीं रहती, बस उनका अड्डा है जहाँ वो मस्ती करते हैं। उसने अपनी गाड़ी एक किनारे पर खड़ी कर दी और मुझे अपनी कार में ही नंगी होने को कहा।

मैंने उसे मना कर दिया तो उसे गुस्सा आ गया और उसने मुझे एक थप्पद मार दिया और मेरे सूट की कमीज़ पूरी तरह से फाड़ दी और निकाल कर बाहर फेंक दी। मैंने सोचा कि कार में ही तो नंगी होने को कह रहा है इसलिये उसकी बात मान कर मैंने सलवार उतार दी और तुरंत पूरी नंगी हो गयी। तभी उसने मुझे नंगी ही कार से नीचे उतरने को कहा ओर बोला, “दूर सामने जो घर है वो मेरा ही घर है और तुझे वहाँ तक ऐसे ही जाना है।” वहाँ से उसका घर तकरीबन एक किलोमीटर होगा। वहाँ ना के बराबर आबादी थी इसलिये खेतों के पार इतनी दूर से भी वो घर दिखायी दे रहा था। इस कहानी की लेखिका रेहाना हुसैन है!

मैंने विशाल से कहा, “प्लीज़ ऐसा मत करो कोई देख लेगा... मैंने ड्रिंक भी कर रखी है.... वहाँ तक चल कर जाना मुश्किल होगा!”

वो बोला, “चूतिया साली रंडी! ज्यादा नाटक मत कर... कोई नहीं देखेगा तुझे और अगर देख भी लिया तो क्या होगा साली... जितनी जल्दी करेगी उतना ही अच्छा होगा वरना रास्ते में जो मिलेगा तुझे चोद देगा।” मेरे पास लोई चारा नहीं था तो मैं धीरे से कार से नीचे उतरी। उसने तुरंत अपनी कार स्टार्ट की और वहाँ से भगा कर अपने घर ले गया। अब मैं सिर्फ ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने वहाँ पूरी नंगी खड़ी थी। मुझे बहुत शरम आ रही थी कि कोई मुझे इस हालत में देख लेगा तो क्या होगा। मेरा सारा सामान विशाल की कार में पड़ा हुआ था।

अब मैंने उसके घर की तरफ़ जाना शुरु कर दिया। उस सड़क पर एक दम अंधेरा था और जैसे जैसे मैं आगे जा रही थी तो रोश्‍नी आनी चालू हो गयी थी। तकरीबन दस मिनट तक मैं ऊँची पेंसिल हील की सैन्डल पहने नंगी उस कच्चे रास्ते पर चलती रही और अभी आधा रास्ता भी तय नहीं हुआ था। नशे में थोड़ा सिर घूम रहा था और मैं बहुत ज्यादा डर रही थी। तभी एक दम से पीछे कोई गाड़ी आने की आवाज़ आयी और मैंने घबराहट में भागना चालू कर दिया। ऊँची पेंसिल हील की सैन्डल और नशे की हालत में भागना आसान नहीं था पर फिर भी जितना मुझसे हो सका, जैसे-तैसे मैं भागी। अभी मैं थोड़ा दूर तक ही भागी थी कि पीछे से एक सफारी कार आयी और उन्होंने मुझे देख लिया और कार एक दम मेरे पास ला कर रोक दी। इस कहानी की लेखिका रेहाना हुसैन है!

उसमें दस मर्द मौजूद थे। तभी एक बोला, “लगता है ये ही विशाल का नया माल है तभी तो ऐसे सड़क पर नंगी घूम रही है!” तभी उन्होंने मुझे कहा कि “चल आजा अंदर आ जा! तुझे विशाल के घर ले जाते हैं... हम भी वहीं जा रहे हैं।” मैंने उनसे कहा कि “विशाल ने मुझे कहा है कि किसी से लिफ्ट लेकर मत आना वरना वो मुझे सज़ा देगा... इसलिये प्लीज़... खुदा के लिये मुझे ऐसे ही जाने दो!” तभी उनमें से एक ने कहा “वो हमारा ही दोस्त है और उसने ही हमें बुलाया है... कुछ नहीं कहेगा... चल साली रंडी कुत्तिया... आ जा अंदर... ज्यादा नखरे मत कर!”

मैंने उनकी बात मान ली पर उनकी गाड़ी पूरी तरह से भरी हुई थी और बैठने के लिये कोई जगह नहीं थी। तभी उन्होंने मुझे अंदर खींच लिया और पीछे जो चार मर्द बैठे थे उन्होंने अपने पास बिठा लिया। मैं अब एक कार में दस मर्दों के बीच में नंगी पड़ी हुई थी। वो कह रहे थे “क्या माल फ़सा कर लाया है विशाल! यार ये तो बड़ी मस्त है!”

कोई मेरे बोब्बे दबा रहा था तो कोई चूत में उँगली देने लगा तो कोई गाँड में। सभी ने शराब पी रखी थी और उनमें से कुछ के हाथ में शराब की खुली बोतलें भी थीं। उनमें से एक मर्द ने मेरे मुँह में भी वो देसी शराब उड़ेल दी। मुझे बहुत अजीब महसूस हो रहा था और बहुत ज्यादा शरम आ रही थी। मेरी आँखों में तो आँसू आ गये थे। वासना में अंधी हो कर विशाल और उसके दोस्तों से चुदने के लिये मैंने ही तो ज़िद्द करी थी।

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