गाँव में मेरी गैंगबैंग चुदाई - भाग २

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गाँव में मेरी गैंगबैंग चुदाई - भाग २

तभी उन्होंने गाड़ी विशाल के घर के आगे रोक दी और मुझे नीचे उतार दिया। सभी दस मर्द भी नीचे उतर गये। तभी उनमें से एक बोला, “यार इस कुत्ती को अपनी गुलाम बना लेते हैं!” तभी उनमें से एक मर्द ने मेरी गर्दन में कुत्ते वाला पट्टा बाँध दिया और मुझे एक कुत्ती कि तरह अपने दोनों हाथ और पैरों के बल चलने का हुक्म दिया।

मैंने वैसा ही किया जैसा उन्होंने कहा था। फ़िर वो मुझे कुत्ती कि तरह विशाल के घर के अंदर ले गये। वहाँ जो मैंने देखा वो देख कर मैं हैरान रह गयी। वहाँ पर आठ मर्द पहले से ही मौजूद थे। मैं इतने मर्द देख कर डर गयी और विशाल से मिन्नत करने लगी कि “प्लीज़ मुझे जाने दो! मैं इतने जनों से नहीं चुदवा पाऊँगी।” इस बात पर सभी हंसने लगे और विशाल बोला कि “सभी लड़कियाँ पहले ऐसे ही कहती हैं! तेरी सहेली रुबिना भी पहले ऐसे ही बोली थी पर अब देख वो किस तरह मस्त हो कर दर्जनों मर्दों से एक साथ चुदवाती है!” मुझे रूबिना पर बहुत गुस्सा आया कि उसने मुझे कहाँ फंसा दिया। इस कहानी की लेखिका रेहाना हुसैन है!

तभी विशाल ने सफारी कार वाले मर्दों से पूछा के क्या मैं चल कर आयी हूँ या उनकी कार में तो उन्होंने कहा कि “कार में।” इस बात पर विशाल को बहुत गुस्सा आया और उसने मुझे कहा, “साली भेनचोद रंडी! मैंने कहा था ना कि पूरा रास्ता चल कर आना है तो तू इनकी कार में क्यों आयी? अब तुझे इसकी सज़ा मिलेगी।” मैंने कहा, “इन सभी ने कहा था कि ये तुम्हारे दोस्त हैं तो इसलिये इनके साथ चलूँ... तुम मुझे कुछ नहीं कहोगे अगर मैं इनके साथ आ भी जाती हूँ!”

विशाल ने कहा, “भेनचोद! कोई भी मेरा नाम लेगा तो उसके साथ चली जायेगी क्या ऐसे ही? सज़ा तो मिलेगी तुझे और अगर अब तू कुछ बोली तो सज़ा और बढ़ती जायेगी और वैसे भी यहाँ आस पास कोई नहीं रहता… जितना मरज़ी चींख लेना... यहाँ पर कोई नहीं सुनेगा तेरी... इसलिये भलायी इसमें ही है कि चुप चाप जो मैं कहता हूँ वो ही करती रह।” विशाल ने मुझे कहा कि “तेरी सज़ा तुझे कल देंगे... अभी फ़िलहाल वक्त के लिये माफ़ कर रहा हूँ पर कल को सज़ा जरूर मिलेगी!”

मैं खुश हो गयी कि अब तो सज़ा से बच गयी। तभी सभी अठारह मर्द नंगे हो गये। सभी के लन्ड सात इंच से ज्यादा के थे। मैं सोच रही थी कि आज इतने लन्ड मैं कैसे ले पाऊँगी। उन्होंने मुझे देसी ठर्रे की बोतल पकड़ायी और पीने को कहा। पहले कभी देसी शराब नहीं पी थी। बहुत ही तीखा अजीब सा स्वाद था पर मैंने गटागट वो आधी बोतल पी डाली। इतने में ही ज़ोरदार नशा चढ़ गया और मैं झूमने लगी। तभी सभी मर्दों ने मुझे बीच में ज़मीन पर बिठा लिया और मेरे चरों तरफ़ एक घेरा बना लिया। अब मैं सभी के लन्ड चूसने लग पड़ी। मैं कभी किसी का लन्ड चूस रही थी तो कभी किसी और का।

इसी बीच में किसी ने मेरी चूत में लन्ड भी डाल दिया। एक और जने ने मेरी गाँड मारनी चालू कर दी। जब गाँड में लन्ड घुसा तो बहुत तेज दर्द होने लगा। मेरी दर्द के मारे जान निकली जा रही थी। मेरे मुँह से कोई आवाज़ भी नहीं निकल रही थी क्योंकि मुँह में भी लन्ड डला हुआ था। अब मेरी हर तरफ़ से चुदाई हो रही थी। मेरे तीनों छेदों, चूत, गाँड और मुँह में लन्ड थे। उसके अलावा मैंने अपने दोनों हाथों में भी लन्ड पकड़ रखे थे और कईं जने मेरे बोब्बे दबा रहे थे। दो जने झुक कर मेरी दोनों बगलों में अपना लन्ड रगड़ रहे थे और दो जने मेरे दोनों पैर पकड कर मेरे सैंडलों पर अपने लन्ड रगड़ रहे थे। इस कहानी की लेखिका रिहाना हुसैन है!

हद तो तब हो गयी जब उन्होंने मेरी चूत में एक ही वक्त पर दो लण्ड घुसाने शुरू कर दिये। मैंने कहा, “प्लीज़ खुदा के वास्ते ऐसा मत करो मेरी चूत फट जायेगी... मैं दो लन्ड नहीं ले पाऊँगी!” पर सभी मर्द चुदाई के नशे में चूर थे। वो मेरी बात कहाँ सुन रहे थे... बस चुदाई में मसरूफ थे।

तभी एक तेज झटके ने मेरी बहुत जोर से चींख निकाल दी। मेरी चूत में दो लन्ड एक साथ जा चुके थे। मेरी चूत में बहुत तेज़ दर्द होने लगा था और मेरी आंखों में आँसू आ गये थे।

पर अभी तो मेरी चुदाई स्टार्ट हुई थी। अभी तो सिर्फ़ छः-सात जनों ने ही मुझे चोदा था। ऊपर से पूरी रात अभी पड़ी थी। सभी मुझे चोद रहे थे बारी-बारी से। सभी अपना वीर्य मेरे जिस्म पर ही गिरा देते या मेरे मुँह में। मेरा पूरा चेहरा और जिस्म उन मर्दों के पसीने और वीर्य से भर गया था। चुदाई करते हुए सुबह के तीन बज चुके थे पर उन मर्दों की चुदाई की भूख कम नहीं हो रही थी। हर किसी ने कम से कम दो बार वीर्य निकाल दिया होगा मेरे ऊपर और अब भी चोद रहे थे मुझे। इस वहशियाना चुदाई में मज़ा तो मुझे भी खूब आ रहा था।

ऐसा सुबह तक चलता रहा और वो सुबह के सात बजे तक मुझे चोदते रहे। मेरे पूरे जिस्म पर वीर्य था और उन मर्दों का पसीना। अब तो दिन भी चढ़ने लगा था। सभी मर्दों ने अब चुदाई बंद कर दी थी और मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी थे। मुझसे चला भी नहीं जा रहा था ठीक तरह से। तभी विशाल ने मुझे कहा कि “तुम्हें रात कि सज़ा मिलनी अभी बाकी है।” मैंने विशाल से कहा, “अब कोई सज़ा मत देना प्लीज़... मैंने तुम लोगों का हर तरह से चुदाई में साथ दिया और मुझे मज़ा भी आया लेकिन मेरी हालत अब बहुत खराब है इतनी चुदाई करवा कर।”

इस बात पर विशाल और गुस्सा हो गया और कहने लगा, “साली रंडी! तुझे कहा था ना कुछ बोलना मत और अब तुझे डबल सज़ा मिलेगी!” मैं चुप कर गयी और कुछ देर बाद कहा, “ठीक है मुझे तुम्हारी हर सज़ा मंज़ूर है पर बताओ तो सही करना क्या है?” इस पर विशाल ने अपने एक दोस्त को कार में से मेरे कपड़े लाने को कहा। वो जल्दी से मेरे कपड़े ले कर आ गया। मेरे सूट की कमीज़ तो विशाल ने पहले ही काफी हद तक फाड़ दी थी। इस बार विशाल ने मेरे पूरे सूट को फाड़ दिया और सिर्फ़ मेरी पैंटी बची थी।

उसने मुझे मेरी पैंटी दी और कहा ये लो इसे पहन लो और घर चली जाओ। मैंने विशाल से कहा, “मैं ऐसे घर नहीं जा सकती इस हालत में!” इस पर उसने कहा, “ठीक है अगर तुम्हे कपड़े चाहिये तो वो तुम्हें यहाँ से दो किलोमीटर दूर एक घर है... वहाँ मिलेंगे और तुम्हे वहाँ तक नंगी ही जाना पड़ेगा और वो भी चल कर।” ये मेरी पहली सज़ा थी। मैंने मना नहीं किया और मान गयी। रात भर अठारह मर्दों से चुदने के बाद मैं पक्की बेशरम बन चूकी थी।

मैं तुरंत घर के बाहर आ गयी विशाल के साथ और उसने मुझे उस घर का रास्ता भी समझा दिया जहाँ जा कर मुझे अपने कपड़े लाने थे। अब दिन का वक्त था और सुबह के साढ़े सात बज चुके थे। उस छोटे गाँव में ले दे कर एक बीड़ी फैक्ट्री थी इसलिये उस गाँव में ज्यादातर सिर्फ मर्द ही रहते थेजो उस फैक्ट्री में मज़दूरी करते थे। अब मैं बेशरम बन कर गाँव में मादरजात नंगी ही ऊँची हील की सैंडल खटखटाती चल पड़ी। वैसे तो वो रास्ता सुनसान ही था पर बीच में इक्का-दुक्का लोग आ जा भी रहे थे और सभी मेरी तरफ़ देख रहे थे। शायद विशाल के चुंगल में फंसी मेरी जैसी हालत में और औरतें भी देखी होंगी उन्होंने पहले। इस कहानी की लेखिका रिहाना हुसैन है!

पूरी रात की घमासान चुदाई की वजह से मैं ठीक तरह चल नहीं पा रही थी। दारू का नशा भी उतरा नहीं था और पैरों में ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल भी थे। सैंडल उतार देती पर गाँव के कच्चे पत्थरीले रास्ते पर नंगे पैर चलने से तो ऊँची हील के सैंडल पहन कर दो किलोमीटर चलना ज्यादा मुनासिब था। सबसे पहले दो मर्दों ने मुझे नंगी देखा। उन्होंने मेरे को वहीं पर पकड़ लिया और उन्होंने मुझे वहीं पर चोदना चालू कर दिया। मैंने भी कोई ऐतराज़ नहीं किया और खुशी से अमादा हो कर चुदाई में शामिल हो गयी। अभी वो मुझे चोद ही रहे थे कि वहाँ पर और तीन आदमी आ गये। उन्होंने भी मुझे चोदने का मन बना लिया। इस तरह वहाँ पर अब पाँच मर्द मुझे चोदने लगे। मेरी चूत और गाँड तो अब तक बहुत खुल चूकी थी क्योंकि रात में मैंने एक साथ दो-दो लन्ड लिये थे अपनी चूत में।

अब उन्होंने मुझे वहीं कच्ची सड़क के किनारे ले जकर चोदना स्टार्ट कर दिया। सभी चुदाई के भूखे थे और मेरे ऊपर कुत्तों की तरह टूट पड़े। अब मुझे पाँच मर्द चोद रहे थे। एक लन्ड मेरी चूत में, दूसरा मेरी गाँड में और तीसरा मेरे मुँह में, चौथा और पाँचवा मेरे हाथों में। उन सभी ने बारी-बारी से अपनी जगह बदली और तकरीबन डेढ़-दो घंटे तक मुझे वहीं चोदते रहे। जब चुदाई खत्म हुई तो वो मुझसे पैसे माँगने लगे। मैंने हैरान हो कर पूछा कि किस बात के पैसे, तो वो वो बोले कि तेरी चुदाई करने के पैसे। जब मैंने कहा कि मेरे पास तो इस वक्त पैसे नहीं हैं तो वो मुझे गालियाँ बकते हुए अपने रास्ते चले गये।

मैं उठ कर आगे चल पड़ी। अब मैं बहुत धीरे चल रही थी क्योंकि मेरी बहुत ज्यादा चुदाई हो चूकी थी और मैं बहुत थक चूकी थी और मुझे मालूम था कि अभी और चुदाई होगी। मैं तकरीबन साढ़े दस बजे उस घर में पहुँची तो देखा कि वहाँ पर ताला लगा हुआ था और बाहर एक पर्ची थी जिस पर लिखा था कि तुम यहाँ देर से पहुँची हो, इसलिये तुम्हारे कपड़े वहीं पर पहुँचा दिये गये हैं जहाँ से तुम आयी हो। इसलिये वापिस चली जाओ। मैं ये पढ़कर वापस जाने लगी। मैं ये सोच रही थी कि अगर फ़िर से रास्ते में कोई मिल गया तो फिर से चुदाई हो जायेगी और फिर से लेट हो जाऊँगी। इस कहानी की लेखिका रिहाना हुसैन है!

मैं थक भी गयी थी और मेरी टाँगें भी दुख रही थीं पर मैं फिर भी जितना हो सके तेज़ चलने लगी। इस बार मुझे रास्ते में चार आदमी और मिले और उन्होंने भी मेरी चुदाई स्टार्ट कर दी वहीं सड़क पर। तकरीबन डेढ़ घंटे तक मैं उनसे बारी-बारी से चुदवाती रही। मैं हैरान थी कि इन मर्दों ने भी मुझसे मेरी चुदाई करने के पैसे माँगे। जब मैंने कहा कि उन्हें देने के लिये मेरे पास कुछ नहीं है तो वो भी मुझे उल्टा-सीधा कहते हुए आगे बढ़ गये।

उसके बाद मैं वहीं पहुँच गयी जहाँ से आयी थी। मैंने विशाल से कहा, “अब तो मेरी सज़ा हो गयी है... प्लीज़ अब मेरे कपड़े दे दो!” इस पर उसने कहा, “अभी तो तेरी एक सज़ा पूरी हुई है... अभी दूसरी बाकी है और तेरी दूसरी सज़ा बहुत ही मुश्किल होगी।” उसके बाद उसने कहा कि “तुझे आज भी यहीं रहना पड़ेगा और कल सुबह तू यहाँ से जायेगी!” उसके बाद विशाल ने मुझे खाना और पानी दिया और कुछ देर के लिये आराम करने को कहा। मैंने तकरीबन दो घंटे आराम किया।

अभी मैं सो रही थी कि विशाल ने आ कर मुझे उठा दिया और कहने लगा, “अगर अबकि बार कुछ भी बोली तो सज़ा और बढ़ा दी जायेगी इसलिये जो कहता हूँ चुपचाप करती जा।” मैं कुछ भी नहीं बोली और चुप रही। अब दोपहर के तकरीबन एक बज चुके थे और अभी भी मैं नंगी ही थी।

विशाल ने मुझे कहा, “आज तुझे और बहुत जनों से चुदना है!” अब तो मैं बेशरम बन चूकी थी और मेरी चूत, गाँड और मुँह सभी छेद बहुत बुरी तरह चुद चुके थे और अच्छी तरह से खुल चुके थे क्योंकि मैंने सभी में बहुत मोटे-मोटे लन्ड लिये थे। विशाल ने मुझे कहा कि “तेरी दूसरी सज़ा ये है कि तुझे आज शाम के सात बजे तक गाँव में से दो हज़ार रुपये कमा कर लाने हैं और वो भी नंगी रह कर ही और अगर सात बजे से लेट हुई या पैसे कमा कर नहीं ला पायी तो तेरी चुदाई पूरे एक हफ़्ते तक होती रहेगी!”

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