कमसिन भांजी अधेड़ मामा - भाग २

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कमसिन भांजी अधेड़ मामा - भाग २

वो उस पेपर को लेके सीधे मेरे पास मेरे ऊपर वाले रूम में अचानक से आ गई और मैं दीदी को नहाते हुए देख कर अपना लंड जोर-जोर से हिला रहा था। और रिंकी मेरे कमरे में कब आई मुझे पता भी नहीं चला और वो दरवाजे के पास खड़े हो कर मुझे और मेरे लंड को देख रही थी।

लेकिन उसने कुछ नहीं बोला और जब तक मेरा पानी निकल नहीं गया तब तक वो वहीं पे खड़ी हो कर देख रही थी। और स्पर्म निकलने के बाद जैसे ही मैं रिलैक्स हो कर घूमा तो रिंकी को देख कर डर सा गया और जल्दी से अपना पैंट पहन लिया। और फिर रिंकी ने पूछा।

रिंकी: मामा! ये तुम क्या कर रहे थे। अपनी ही दीदी को नंगी नहाते देख रहे थे और ऊपर से यह गलत काम (मुठ मारना) भी कर रहे थे. मैं अभी नीचे जा कर मम्मी को बताती हूँ.

मैं: सॉरी रिंकी दीदी मैं अब दोबारा ऐसा कभी नहीं करूंगा। तुम जवान हो और समज सकती हो कि मैं कितने दिनों से अपनी बीवी यानि तुम्हारी मामी से दूर हूँ तो आज जब मुझे नीचे दीदी के नहाने की आवाज़ आयी तो मैंने उसे देख लिया. प्लीज तुम किसी को इसके बारे में मत बोलना प्लीज़्ज़.........

रिंकी: (रिंकी ने अपने हाथ से वो पेपर दिखाते हुए बोला) और ये पेपर किसका है?

मैं: ये भी मेरा है। सॉरी रिंकी गलती से पैंट में ही रह गया.

रिंकी: वो तो ठीक है पर यह इतना गीला क्यों है. क्या लगा है इसमें.

(यह कहते हुए रिंकी शरारत से मुस्कुरा रही थी. जानती तो वो सब कुछ थी ही.)

रिंकी को शरारत से मुस्कुराते देख कर मेरा होंसला बढ़ गया और मैं बोला.:- "रिंकी तुम समझदार हो, पर मुझे नहीं पता कि इस पर क्या लगा है. जरा सूंघ कर देखो तो क्या है.

रिंकी शर्म से लाल हो गयी पर मुझे चिढ़ाते हुए मेरे माल को पेपर पर सूंघते बोली

"मामा! पता नहीं क्या लगा पर पर खुशबू अच्छी आ रही है."

मैं भी छेड़ते बोला

"तो इसे थोड़ा चाट कर देखो क्या लगा है?"

रिंकी शर्मा गयी पर उसे भी इस छेड़छाड़ में मझा आ रहा था, पता तो था ही कि यह मेरे लण्ड का रस है, तो उसने ऊँगली से मेरा थोड़ा सा माल लिया और अपनी माल से भरी ऊँगली अपनी मुंह में डाल ली. अपनी कमसिन भांजी को अपना लण्ड रस चाटते देख कर तो मेरा लौड़ा फिर से तन गया. जी कर रहा था कि अभी उसे पकड़ कर चोद दूँ, पर घर में अभी दीदी भी थी. तो करता भी तो मैं करता?

मैं रिंकी को लैंड रस चाटता देखता रहा. रिंकी का चेहरा पूरा लाल हो गया था शर्म से. पर फिर वो बात को घुमाते बोली

"मामा यह तो पता नहीं कि पेपर में क्या लगा है. खैर बात को टालो मत. आपको शर्म नहीं आती कि आप अपनी दीदी नंगी देख कर ऐसा गंदा काम करते हो"

मैं: सॉरी रिंकी बेटा ....... मैं अब नहीं करूंगा।

रिंकी: ठीक है पहली बार होने के कारण मैं छोड़ रही हूँ लेकिन अगर दोबारा ऐसा काम किया तो मैं सब को बता दूंगी।

उसके बाद हम दोनों रेडी हो कर कॉलेज चले गए लेकिन पूरा दिन मेरे दिमाग में रिंकी और मेरी दीदी ही आ रही थी। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं।

उधर दूसरी तरफ रिंकी के दिमाग में भी मेरा 7 इंच का लंबा लंड आ रहा था (जो मुझे उसने बाद में बताया)। हम दोनों की हालत खराब होती जा रही थी। फिर शाम को हम दोनों घर आ गए लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि एक-दूसरे से बात करें।

फिर कुछ देर बाद रिंकी मुझसे नॉर्मल बात करने लगी मुझे भी थोड़ा अच्छा लगा। और मैं भी उससे नॉर्मल हो कर बात करने लगा।

आज की इस घटना से रिंकी की भी कामवासना शायद बढ़ गयी थी. वो भी अब मुझ में ज्यादा इंटरस्ट लेने लगी थी,

अगले दिन एक अजीब घटना हुई, जो मुझे लगता है की रिंकी ने जानबूज कर करी, शायद वो भी हमारे रिश्ते को आगे ले जाना चाहती थी या चूत की गर्मी से उस ने वो हरकत की. पर इस से मुझे बहुत मजा आया.

अब रिंकी जान ही चुकी थी की जब उस की माँ यानि मेरी दीदी बाहर आँगन में नहाती है तो मैं ऊपर से उसे नंगी देखता हूँ.

(रिंकी को मालूम नहीं था की मैं तो उसे भी बाथरूम में नहाते देखता हूँ और मुठ भी मारता हूँ. तो रिंकी ने अपनी जवानी का भी मुझे दर्शन करवाने का सोचा होगा शायद).

हुआ कुछ ऐसा कि अगले दिन जब सुबह हो जाती है और मैं उठता हूं, घडी का समय देखता हूं अभी सुबह के 6:00 बजे बजे रहते हैं। दीदी आज लेट उठेंगी क्योंकि आज तो रविवार था. और हम को कहीं जाना नहीं था. और दीदी अभी सो रही थीं.

अचानक मुझे नीचे आँगन में से जोर से बाल्टी गिरने की आवाज आती है.

(बाद में पता चला की मेरा ध्यान आकर्षित करने के लिए रिंकी ने ही जानबूज कर आवाज की थी.).

साथ ही मुझे पानी गिरने की आवाज आती है तो मैं देखता हूं हमारे घर के आँगन में आज मेरी भांजी बाल्टी में पानी भर रही थी, और शायद वो आज आँगन में खुले में नहाने वाली थी. मेरे तो मजे लग जाते हैं. आज खुले में रिंकी तो नंगी देखूंगा. छुट्टी के दिन की इस से अच्छी शुरुआत और हो भी क्या सकती है भला?

रिंकी पानी भर रही थी और यहां-वहां देख रही थी कोई है तो नहीं और बैठ जाती है नहाने के लिए और मैं चुपचप ऊपर से देख रहा हूं. पता तो शायद रिंकी को भी था कि मैं खिड़की पर आ चूका हूँ.

अब भांजी जग में पानी निकाल के अपने ऊपर डालती है वह भी सूट के ऊपर ही अभी भांजी ने कपड़ा नहीं खोला मैं सोच रहा था कहीं ऐसी तो नहीं नहाती कपड़े के ऊपर से मैं उनको पूरा नंगा देखना चाहता था और उनका सूट भीग चुका था पानी से और उनकी चूचियां सूट के ऊपर से ही मस्त लग रहे थे मेरे दिल की धड़कन में बढ़ने लगी थी. पर शायद वो मुझे छेड़ने के लिए अभी कपडे नहीं खोली थी.

रिंकी की ब्रा भी दिख रही थी सूट के ऊपर से, मैं सोच रहा था कि भांजी एक बार अपनी चूची दिखा दो मजा आ जाएगा आज का दिन बन जाएगा देखता हूं तो भांजी अपना सूट ऊपर करती है और कमीज निकाल देती है. फिर सलवार थोड़ा सा नीचे करके उसे भी निकाल कर परे रख देती है. अब उसकी कच्छी भी दिखने लगती है और वो उस पर पानी डालने लगती है.

और अपने पेट साफ करने लगती हैं अब भांजी अपनी ब्रा निकालती हैं मैं तो मस्त मोटे मोटे मुम्मे देख कर मस्त ही हो जाता हूँ.

मैं अभी भी चुपके से देख रहा था और मेरे दिल की धड़कन बढ़ रही थी और मेरा लंड खड़ा होने लगा था और भांजी साबुन लेकर अपनी चूची पर रगड़ने लगती है और अपनी चूची के निपल को अपनी उंगलियों से सहलाने लगती है मैं यह देख कर खुश हो जाता हूं. और फिर वो अपनी चुची दबाने लगती है और फिर थोड़ी ही देर में वो अपनी कच्छी भी निकाल देती है और पूरी तरह से नंगी हो जाती है.

नंगी हो कर रिंकी एक बार तिरछी नजर से मेरे कमरे की खिड़की की तरफ देखती है. वो बहुत छुप कर देखने की कोशिश करती है पर मेरे नजर से उस की यह हरकत छुपी नहीं रह पाती. वो भी शायद मेरी परछाई खिड़की में से देख लेती है और जान जाती है की उस का मामा उस को निहार रहा है. मैं समझ जाता हूँ की रिंकी का यह सारा प्रदर्शन आज मेरे लिए है. मेरा तो लौड़ा लोहे जैसे कस जाता है और में उसे बाहर निकाल कर सहलाने लगता हूँ.

भांजी आप पूरी तरह से नंगी हो जाती हैं मैं देख कर बावला सो जाता हूं ऐसे तो जकर अभी चोद दू क्या मस्त माल है यार.

भांजी अपनी चूत को अपने हाथ से रगड़ रही थी और एक हाथ से अपनी चुचियां दबा रही थी मैं यहां सब ऊपर से देख रहा था और उनको भी यह जानकारी थी कि मैं देख रहा हूं. वो अपने में मस्त थी और अब नहाने के बाद उसने अपनी एक ऊँगली अपनी चूत में डाल ली और अपनी चूत में उंगली डालकर आगे पीछे कर रही थी।

अब यह सब मेरी सहनशक्ति के बाहर था.

मेरा लण्ड बिलकुल खड़ा हो चुका था और मेरा हाथ मेरे लण्ड पर चला जाता है और मैं अपना लौड़ा मसलने लगता हूं और भांजी अब झड़ने वाली होती है और कुछ देर में झड़ जाती हैं और चूत में से उंगली निकाल के देखने लगती है उसका बिल्कुल हाथ गिला हो चुका था उनकी चूत के पानी से, फिर वो अपना हाथ धोती हैं और उठ कर कपड़े पहनती हैं

फिर रिंकी उठ कर पास में जाकर नाली के पास बैठ जाती हैं और पेशाब करने लगती हैं.

रिंकी की चूत बिल्कुल साफ थी बाल बिल्कुल भी नहीं था बिल्कुल चिकना करके रखा था.

मेरे को पूरा मजे का फिल्म दिखा कर मेरी भांजी पैंटी पहनने लगती हैं और फिर ब्रा और फिर कमीज पहन कर खड़ी हो जाती है.

जाते हुए रिंकी के चेहरे पर एक शर्म और शरारत भरी एक प्यारी सी मुस्कान थी. जाते जाते उसने धीरे से नजर तिरछी करके फिर से मेरी खिड़की की तरफ देखा। और जब उसने खिड़की के कांच में से मेरा हिलता हाथ और मुझे देखा तो शर्माती सी वो चुपचाप चली गयी. मेरा तो आज दिन ही खुशनसीब वाला था.

मजा आ गया अपनी नंगी भांजी को देख कर.

रिंकी को मैंने कई बार बाथरूम में नहाते और ऊँगली करते देखा था पर यह सब रिंकी को मालूम नहीं था. इसलिए उस का आज का यह शो मेरे लिए स्पेशल शो था. रिंकी को इतना तो मालूम था कि मैं उसकी माँ को यहाँ आँगन में नहाते नंगी देखता हूँ तो आज उसने मेरे लिए यह विशेष प्रोग्राम किया था.

मुझे लग रहा था कि अब क्योंकि रिंकी भी मेरे में उत्सुक है तो वो दिन ज्यादा दूर नहीं है जब मैं उसे चोद पाउँगा.

पर शायद ईश्वर को अभी हमारा मिलान मंजूर नहीं था. हुआ यह कि रिंकी ने रायपुर में एक पेपर देना था अपनी 12 वी क्लास के आगे की पढाई के लिए. यदि वो पेपर उसका क्लियर हो जाता तो उसका दाखिला हमारे ही शहर यानि रायपुर के कॉलेज में हो जाता. तो यदि ऐसा हो जाता तो मेरे लिए तो यह स्वर्ग मिलने जैसी बात होती, क्योंकि तब मैं उसे अपने घर पर पढ़ने के लिए रहने को बोल देता. और क्योंकि वो मेरी भांजी थी और मेरे बच्चे की उम्र की थी तो मामा के घर रह जाती और हम मझे कर सकते थे.

मैं तो भगवान् से यही प्रार्थना कर रहा था की उसका सिलेक्शन हो जाये. शायद रिंकी भी यही सोच रही हो. तो हमे रात तो रायपुर के लिए जाना था.

ये बात अब उस रात की है जब मैं अपनी दीदी, भांजी रिंकी, और भतीजे मयंक के साथ रायपुर के लिए बस में सवार हुआ था। उस रात का माहौल, बस की भीड़, और उस अनजाने रोमांच ने मेरी जिंदगी को एक नया मोड़ दे दिया। ये कहानी मेरी और मेरी भांजी रिंकी के बीच उस बस यात्रा में घटी एक ऐसी घटना की है, जिसे मैं आज भी याद करके गर्म हो जाता हूँ।

जाने की जल्दी में मैंने ट्रेन की टिकट बुक करने की कोशिश की थी, लेकिन सीट नहीं मिली। आखिरकार, बस ही एकमात्र रास्ता बचा था।

मैं, दीदी, रिंकी, और मयंक (जो 10 साल का था) बस अड्डे पर पहुंचे। बस खचाखच भरी थी। न कोई खाली सीट, न कोई आराम। लोग ठूंस-ठूंस कर भरे थे। कुछ खड़े थे, कुछ सीटों पर लदे हुए। बस अड्डा उस रात किसी मेले से कम नहीं था। हॉर्न की आवाज़, लोगों की चिल्ल-पों, और सामान की धक्का-मुक्की ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया था।

किसी तरह हमें एक डबल सीट मिली, जिस पर मैं और दीदी बैठ गए। लेकिन रिंकी और मयंक के लिए कोई जगह नहीं थी। दीदी ने मयंक को अपनी गोद में बिठा लिया, और रिंकी को हमने बीच में इस तरह सेट किया कि उसका आधा चूतड़ मेरी जांघ पर था और आधा दीदी की जांघ पर। रिंकी की मुलायम जांघ मेरी जांघ से टच हो रही थी, और उसका हल्का-सा वजन मेरे शरीर में एक अजीब-सी गर्मी पैदा कर रहा था।

मेरा लण्ड तो रिंकी की जांघ का स्पर्श प् कर ही खड़ा हो गया था. शायद रिंकी भी कुछ ऐसा ही अनुभव कर रही थी. मैंने खुद को समझाया, "ये गलत है, दीदी यानि रिंकी की माँ भी साथ में है तो कुछ शर्म करो और चुप रहो,"

लेकिन उस भीड़भरी बस में, जहाँ हर कोई एक-दूसरे से सटकर बैठा था, मन को काबू करना आसान नहीं था।

बस जैसे ही चली, अंदर का माहौल और भारी हो गया। बस की लाइट्स धीमी थीं, और बाहर सड़क की आवाज़ के अलावा सिर्फ लोगों की खर्राटों की आवाज़ थी। रात के 11 बज चुके थे, और थकान की वजह से दीदी और मयंक जल्दी ही सो गए। मयंक दीदी की गोद में सिर टिकाए खर्राटे ले रहा था, और दीदी का सिर बस की खिड़की से टिका हुआ था। लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। रिंकी भी जाग रही थी। उसकी साँसें तेज थीं, और वो बार-बार अपनी पोजीशन बदल रही थी। उसका चूतड़ मेरी जांघ पर बार-बार रगड़ खा रहा था, और हर बार वो रगड़ मेरे शरीर में एक करंट-सा दौड़ा रही थी।

मैंने रिंकी से धीरे से कहा, "क्या हुआ, रिंकी? नींद नहीं आ रही?"

वो बोली, "नहीं मामा, इस तरह बैठने में तकलीफ हो रही है। जगह ही नहीं बन रही।"

उसकी आवाज़ में थकान थी, लेकिन उसका शरीर मेरे इतने करीब था कि मैं उसकी गर्म साँसों को अपनी गर्दन पर महसूस कर रहा था। मैंने कहा, "एक काम कर, तू मेरी गोद में आराम से बैठ जा। बीच में एडजस्ट करने से अच्छा है। दीदी भी सो गई है, और मयंक को भी कोई दिक्कत नहीं होगी।"

रिंकी ने थोड़ा हिचकिचाया,पर शायद उसका मन भी ऐसा ही था. वो हिचकिचाई लेकिन फिर मान गई। उसने धीरे से अपनी पोजीशन बदली और मेरी गोद में बैठ गई। उसका पूरा वजन अब मेरे ऊपर था। उसकी मुलायम गांड मेरी जांघों पर टिकी थी, और उसका पेट मेरे सीने से सटा हुआ था। मैंने उसे स्थिर करने के लिए अपने हाथ उसके कमर पर रखे। उसका दुपट्टा मेरे चेहरे पर आ रहा था, और उसकी खुशबू मेरे होश उड़ा रही थी। बस की हल्की-हल्की हिचकोले और अंधेरा माहौल कुछ ऐसा बना रहा था कि मेरे मन में गलत ख्याल आने लगे।

कुछ सर्दी का भी महीना था. तो ठण्ड तो थी ही. ऊपर से रिंकी ने एक टी शर्ट और स्कर्ट पहन रखी थी.

ठण्ड के कारण उसने शाल ओढ़ ली थी, जिस से उसका शरीर छिप गया था. मेरे लिए अच्छा था यह.

दीदी ने भी अपनी शाल ओढ़ ली थी. और मयंक को भी अपनी शाल में ले लिया था. अब यदि मैं कुछ शरारत करता भी तो भी किसी को कुछ दिखाई नहीं दे सकता था.

पर मेरी दीदी साथ में ही सीट पर बैठी थी तो मेरी कुछ भी करने की हिम्मत नहीं हो रही थी.

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